रेंगता खतरा: केरल में सांप के काटने के मामले भय बढ़ा रहे हैं

तिरुवनंतपुरम, केरल – केरल में सांप के काटने के मामलों में वृद्धि ने व्यापक चिंता और भय का वातावरण बना दिया है। हाल के हफ्तों में बढ़ती सांप काटने की घटनाओं ने राज्य के कई हिस्सों को प्रभावित किया है, जिससे लोगों में अस्थिरता और सुरक्षा की कमी महसूस की जा रही है।
सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है, लेकिन इस बढ़ती समस्या का गहरा प्रभाव परिवारों पर दिख रहा है। कई परिवारों ने अपनी प्रिय जनों को सांप के काटने के कारण खो दिया है। शारद बाबू जॉर्ज ने इन दुखी परिवारों से बात की और विशेषज्ञों से इस संकट की व्यापकता समझने की कोशिश की।
सांप के काटने की घटनाएं विशेषकर ग्रामीण इलाकों और जंगलों के निकट रहने वाले लोगों के लिए खतरा बन गई हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि नमी बढ़ने के साथ-साथ सांपों की गतिविधि भी बढ़ गई है, जिससे अधिक बाइट्स हो रहे हैं। केरल के हर्पेटोलॉजिस्ट डॉ. अनिल कुमार के अनुसार, “सांपों की प्रजातियां जो आमतौर पर छिपकर रहती थीं, वे अब आवासीय क्षेत्रों के करीब आ रही हैं, जिससे लोगों के सांप काटने के मामले बढ़े हैं।”
हर्पेटोलॉजी विभाग के अनुसार, सांप के काटने वाले मामलों में तेजी से उचित चिकित्सा की आवश्यकता होती है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में एंटीवेनम की कमी और प्राथमिक उपचार की जानकारी न होना जानलेवा साबित हो सकता है। केरल सरकार ने इस समस्या को लेकर विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में एंटीवेनम की उपलब्धता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
दुखी परिवारों ने बताया कि घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाना अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है। एक परिवार के सदस्य, सुनील कुमार ने कहा, “हमारे गांव में इलाज की सुविधाएं सीमित हैं। जब मेरे चाचा को सांप ने काटा, तो अस्पताल पहुंचने में बहुत देर हो गई।”
सरकार ने जागरूकता अभियान भी शुरू किया है, जिसमें लोगों को सांपों से बचने के उपाय और काटे जाने की स्थिति में त्वरित कार्रवाई के बारे में जानकारी दी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस संकट से निपटने के लिए सामुदायिक भागीदारी बढ़ेगी, तो सांप काटने के मामलों को कम किया जा सकता है।
केरल में यह समस्या मौसमी बदलाव और पर्यावरणीय कारकों की वजह से भी बढ़ सकती है। स्थानीय प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से जागरूकता के साथ-साथ बेहतर चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है ताकि सांप काटने से होने वाली मौतों और घायलों की संख्या को कम किया जा सके।



