डीवीएसी ने डीएमके सरकार के दौरान कथित रेत खानन घोटाले की जांच शुरू की

डीवीएसी ने डीएमके सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए 4,730 करोड़ रुपये के कथित रेत खानन घोटाले की जांच शुरू कर दी है। इस मामले में ड्रिग्ज़ ऑफ़ एन्फोर्समेंट (ED) ने तामिलनाडु के नदी किनारे अवैध रेत उत्खनन की गंभीर अनियमितताओं की शिकायत की थी। जांच वर्तमान में विस्तार से चल रही है।
जांच का कारण और नोटिस जारी
ईडी की शिकायत के आधार पर क्षेत्रीय अधिकारियों ने जांच शुरू की है। डीवीएसी ने इस घोटाले में शामिल ठेकेदारों, अधिकारियों समेत अन्य लोगों को नोटिस भेजे हैं ताकि प्रारंभिक जांच के तहत अपराध की पुष्टि की जा सके। 13 जून 2024 को ईडी ने पुलिस महानिदेशालय को पहला सूचना विवरण दर्ज करने के अनुरोध सहित अवैध रेत उत्खनन के सबूत भेजे थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम, 2002 के अंतर्गत मामला दर्ज किया है। जांच में आईआईटी कानपुर की एक कंपनी की सहायता से आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का प्रयोग कर रेत उत्खनन की परिमाण का मूल्यांकन किया गया है। सभी 28 नदी रेत उत्खनन स्थलों पर तकनीकी जांच की गई जिसमें सीमाओं से अधिक उत्खनन पाया गया।
GPS डेटा और विधिक प्रक्रिया
ईडी ने उस कंपनी के GPS डेटा का भी सहारा लिया जिसने ठेकेदारों को मशीनरी बेची थी। इस डेटा में मशीनों की वास्तविक स्थिति, कार्य के समय और स्थान के विवरण मौजूद थे। ईडी ने यह भी पाया कि मशीनें राज्य सरकार के निर्धारित सीमाओं और नियमों से बाहर उपयोग की गईं। इस आधार पर 4,730 करोड़ रुपये की अवैध रेत की कीमत बताई गई जो अपराध से अर्जित धन के रूप में संज्ञान में ली गई।
जांच में मिली जानकारी से स्पष्ट होता है कि रेत उत्खनन में गंभीर अनियमितता हुई है और बड़े स्तर पर अवैध गतिविधियां हुई हैं। डीवीएसी की यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी कार्यवाही का हिस्सा है।
राज्य में रेत की चोरी और खनन से होने वाले पर्यावरणीय और कानूनी प्रभावों के मद्देनजर इस मामले की गहरी पड़ताल जरूरी है। जांच पूरी होने के बाद अभियोग चलाने की संभावना है। अधिकारियों का मानना है कि इस घोटाले में उच्चस्तरीय भ्रष्टाचार की गहराई छिपी हुई है।
इस घोटाले की जांच से स्पष्ट हो सकेगा कि किस तरह से रेत सामनित नियमों का उल्लंघन करते हुए अवैध रूप से निकाली गई और कितना आर्थिक नुकसान राज्य को हुआ है। लोक हित में जांच की कठिनाइयों के बावजूद निष्पक्ष परिणाम आवश्यक माना जा रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक इस घोटाले में शामिल ठेकेदारों और अधिकारियों से जांच में पूछा जाएगा। जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी ताकि भविष्य में ऐसे अपराधों की पुनरावृत्ति न हो। जनता की अपेक्षा है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ हो।




