क्राइम

यूपी में योगी सरकार के तहत बेखौफ बदमाशों का आतंक: BJP नेता को घर के बाहर गोली मारी गई

लखनऊ, उत्तर प्रदेश – उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में बेखौफ बदमाशों का आतंक देखने को मिला है। राजधानी लखनऊ के बाजारखाला थाना क्षेत्र में भारतीय जनता युवा मोर्चा के नेता श्याम चेतन तिवारी को घर के बाहर गोली मारने की घटना ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। यह वारदात न केवल स्थानीय निवासियों के लिए चिंता का विषय बनी है, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

श्याम चेतन तिवारी गंभीर रूप से घायल होकर ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराए गए हैं, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। डॉक्टरों की देखरेख में उनका उपचार जारी है। पुलिस ने घटना के तुरंत बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी को हिरासत में लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है।

मेहंदीगंज इलाके में हुई वारदात

पुलिस के अनुसार, शनिवार की शाम को सूचना मिली कि बाजारखाला थाना क्षेत्र के मेहंदीगंज इलाके में गोलीबारी हुई है। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर आसपास के लोगों से जानकारी जुटाई। घायल की पहचान मेहंदीगंज निवासी 35 वर्षीय श्याम चेतन तिवारी के रूप में हुई। स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें जल्द से जल्द ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया।

फायरिंग की खबर फैलते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोग मौके पर एकत्रित हो गए। तत्परता से पुलिस ने स्थानीय सुरक्षा बढ़ा दी ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे।

सीसीटीवी फुटेज ने पकड़ा आरोपी

जांच के दौरान पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद ली। फुटेज के आधार पर आरोपी की पहचान वैभव बाजपेई पुत्र संतोष कुमार बाजपेई निवासी मेहंदीगंज के रूप में की गई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

शुरुआती जांच में पता चला है कि यह वारदात पूर्व की पुरानी रंजिश के चलते हुई है। पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच पहले से विवाद था जिससे यह हिंसक घटना हुई। अभी आरोपी से हत्या के इरादे और हथियार के संबंध में भी पूछताछ हो रही है।

पुलिस जांच सभी पहलुओं पर केंद्रित

पुलिस ने यह स्पष्ट किया है कि जांच में केवल पुरानी रंजिश ही नहीं बल्कि अन्य सभी संभावित कारणों को भी ध्यान में रखा जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस पूरी तरह से विवेकपूर्ण और पारदर्शी तरीके से जांच कर रही है। आगे की विधिक कार्रवाई प्रक्रिया भी तेजी से चल रही है।

यह घटना उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल उठाती है और प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है। स्थानीय लोग और राजनीतिक दल सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं ना दोहराई जाएं।

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