चीन को खाद्य और उर्वरक संग्रह बंद करना चाहिए, पूर्व वर्ल्ड बैंक प्रमुख ने कहा

नई दिल्ली, भारत – पूर्व वर्ल्ड बैंक प्रमुख डेविड मेलपास ने चीन पर खाद्य और उर्वरक सामग्री का भंडारण बंद करने का ज़ोरदार आग्रह किया है। उनका कहना है कि चीन द्वारा अपने आर्थिक विकास के बावजूद खुद को एक विकासशील देश बताना अब विश्वसनीय नहीं रह गया है।
मेलपास ने यह बात एक हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही, जहां उन्होंने चीन की खाद्य सुरक्षा नीति और वैश्विक बाजारों पर इसके प्रभाव की गंभीरता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि चीन ने पिछले कुछ वर्षों में बड़े पैमाने पर खाद्य और उर्वरक-जन्य वस्तुओं का संग्रह कर रखा है, जो विश्वव्यापी आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर रहा है।
पूर्व वर्ल्ड बैंक प्रमुख ने कहा कि चीन की इस नीति से विकासशील और विकासशील देशों में खाद्य और उर्वरक की कीमतों में वृद्धि हुई है, जिससे वहाँ के किसानों और उपभोक्ताओं को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी समझाया कि चीन अब आर्थिक दृष्टि से एक बढ़ती हुई बड़ी अर्थव्यवस्था है और इसलिए उसकी विकासशील देशों के समूह में होने की दावे को पुनर्विचार करने की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, चीन की यह रणनीति वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। मिलपास ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि वे इस विषय पर चीन से संवाद करें और निष्पक्ष व्यापार नियमों के तहत इस समस्या का समाधान खोजें। उन्होंने यह भी बताया कि खाद्य और उर्वरक भंडारण की ऐसी नीतियाँ वैश्विक स्थिरता को बनाए रखने के लिए हानिकारक हैं।
चीन ने इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि इस मुद्दे पर वैश्विक दबाव बढ़ने से चीन को अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम का वैश्विक खाद्य सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़र चीन की नीतियों पर बनी रहेगी। इस विवाद की गूंज न सिर्फ राजनीतिक बल्कि आर्थिक मंचों पर भी सुनाई दे रही है।



