एनटीए की ‘शून्य त्रुटि’ नीति क्यों हुई असफल? | विस्तार से समझाया

नई दिल्ली, दिल्ली
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) फिर विवादों में घिर चुकी है। इस बार भी प्रश्नपत्र लीक की खबरों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नीट की सफलता को लेकर कई बार उठे संदेह और आरोप अब तक कम नहीं हुए हैं, जिससे परीक्षार्थियों और अभिभावकों के मन में भारी असंतोष है।
नीट परीक्षा को आयोजित करने वाली संस्था, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) ने कई नई व्यवस्थाएं अपनाई थीं ताकि परीक्षा को त्रुटि मुक्त और निष्पक्ष बनाया जा सके। इसके बावजूद प्रश्नपत्र लीक की घटनाएं पुनः सामने आई हैं, जिससे ‘शून्य त्रुटि’ नीति की प्रभावशीलता पर संदेह उत्पन्न हुआ है। एनटीए की ओर से दावा किया गया था कि तकनीकी सुरक्षा और कड़ी निगरानी के जरिए प्रश्नपत्रों को सुरक्षित रखा जाएगा, लेकिन बार-बार विशुद्ध कागजी परीक्षा में मशीनों या ऑनलाइन माध्यम की अनुपस्थिति में लीक की आशंका बनी रही।
2024 में हुए वाद-विवाद के बाद कई सुधार प्रस्तावित किए गए। इनमें प्रमुख था नीट को कंप्यूटर आधारित परीक्षण (CBT) में परिवर्तित करना, जिससे प्रश्नपत्र फिर से लीक न हो सकें और परिणामों में पारदर्शिता बढ़े। इससे परीक्षा प्रक्रिया को आधुनिक और सुरक्षित बनाने की उम्मीद जताई गई है। हालांकि, इस परिवर्तन के लिए कई बुनियादी समस्याएं जैसे डिजिटल डिवाइसेस की उपलब्धता, ग्रामीण और शहरी छात्रों के बीच असमानताएं और तकनीकी बाधाएं भी सामने आई हैं।
वर्तमान में, एनटीए द्वारा सुरक्षा प्रोटोकॉल को और भी कड़ा बनाने के प्रयास जारी हैं। साथ ही, विभिन्न राज्यों और केंद्रीय स्तर पर निगरानी तंत्र को सुदृढ़ कर परीक्षा केंद्रों पर सख्ती बढ़ाई गई है। लेकिन अभ्यर्थियों का विश्वास अब भी पूरी तरह बहाल नहीं हो पाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नीट परीक्षा की विश्वसनीयता के लिए तकनीक का प्रयोग करना अनिवार्य है। इसके बिना बार-बार प्रश्नपत्र लीक जैसे मुद्दे सताते रहेंगे, जो पूरे देश के लगभग 20 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं के भविष्य को प्रभावित करते हैं। इसलिए, जमीनी स्तर पर सुधार के साथ-साथ परीक्षाओं के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया को प्राथमिकता देना जरूरी है।
संक्षेप में, नीट परीक्षा की विवादास्पद स्थिति ने यह दर्शाया है कि केवल ‘शून्य त्रुटि’ नीति बनाना काफी नहीं है, बल्कि उसकी सही क्रियान्वयन और आधुनिक तकनीक के प्रयोग से ही परीक्षा प्रणाली को निष्पक्ष, पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जा सकता है। आने वाले सत्रों में एनटीए की ओर से प्रस्तावित सुधारों को सफल बनाने के लिए कड़े उपायों और व्यापक समन्वय की आवश्यकता है।



