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बस्तर की अमर वाटिका पहुंचे अमित शाह, 1,900 जवानों के बलिदान को याद कर हुए भावुक

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केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने सोमवार को छत्तीसगढ़ के Bastar स्थित ‘अमर वाटिका’ स्मारक का दौरा किया। यह स्मारक पिछले 25 वर्षों में माओवादी हिंसा के खिलाफ लड़ाई में शहीद हुए 1,900 से अधिक जवानों की याद में बनाया गया है। बस्तर में शांति बहाली के बाद पहली बार यहां पहुंचे अमित शाह शहीदों के नाम देखकर भावुक नजर आए।

इस दौरान उनके साथ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai और उपमुख्यमंत्री Vijay Sharma भी मौजूद रहे। अमर वाटिका में शहीद जवानों के नाम अंकित स्मारक के सामने माहौल बेहद गंभीर और भावुक हो गया।

गृह मंत्री अमित शाह ने स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद वह औपचारिक कार्यक्रम से हटकर सीधे उन परिवारों के बीच पहुंचे, जिन्होंने माओवादी हिंसा में अपने बेटे, पति और पिता को खोया है। बीजापुर हमले में शहीद हुए जवान कालेंद्र प्रसाद नायक और पवन कुमार मंडावी के परिजनों से मुलाकात के दौरान शाह ने उनका हाथ पकड़कर कहा कि देश उनके बलिदान को कभी नहीं भूलेगा।

अमित शाह ने कहा कि बस्तर में आज जो शांति, सुरक्षा और विकास दिखाई दे रहा है, उसकी नींव जवानों के बलिदान पर टिकी हुई है। उन्होंने कहा कि माओवादी हिंसा के खिलाफ देश की लड़ाई अब निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है और बस्तर अब विकास और विश्वास के नए दौर में प्रवेश कर रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि इन जवानों का बलिदान छत्तीसगढ़ की सामूहिक स्मृति में हमेशा जीवित रहेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बस्तर में विकास और सुरक्षा दोनों मोर्चों पर लगातार काम कर रही है।

25 वर्षों की लंबी लड़ाई की गवाह बनी अमर वाटिका

साल 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद बस्तर क्षेत्र में माओवादी हिंसा के खिलाफ शुरू हुआ अभियान देश के सबसे लंबे आंतरिक सुरक्षा अभियानों में शामिल रहा है। इस संघर्ष में अब तक 1,900 से अधिक जवानों ने अपने प्राण न्योछावर किए हैं। कई बार बड़े हमलों में एक साथ बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी शहीद हुए।

अमर वाटिका उन्हीं बलिदानों की स्मृति में तैयार किया गया स्मारक है, जहां अंकित हर नाम बस्तर की कठिन और लंबी लड़ाई की कहानी बयान करता है।

बस्तर में माओवादी हिंसा के बड़े हमले

  • वर्ष 2007 में Rani Bodli में हुए माओवादी हमले में 55 जवान शहीद हुए थे।
  • वर्ष 2010 में Tadmetla में सीआरपीएफ के 76 जवानों ने जान गंवाई थी।
  • वर्ष 2017 में Burkapal हमले में 25 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए।
  • वहीं 2021 में Tekalgudem में 22 जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था।

बस्तर में हाल के वर्षों में सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और विकास योजनाओं के चलते हालात में सुधार देखने को मिला है। सरकार का दावा है कि क्षेत्र अब हिंसा से निकलकर स्थायी शांति और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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