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सोनभद्र के जंगलों की कीमत पर विकास का दिखावा स्वीकार नहीं : मृदुल मिश्रा

युवा कांग्रेस महासचिव ने पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाओं और वन भूमि विचलन पर उठाए सवाल, पारदर्शी पर्यावरणीय आकलन की मांग

सोनभद्र। वरिष्ठ संवाददाता राम अनुज धर द्विवेदी
युवा कांग्रेस सोनभद्र के महासचिव मृदुल मिश्रा ने जिले में प्रस्तावित पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाओं और बढ़ते वन दोहन को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, जबकि दूसरी ओर सोनभद्र के घने जंगलों को निजी कंपनियों के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है।
मृदुल मिश्रा ने कहा कि सोनभद्र पहले से ही कोयला खनन, तापीय विद्युत परियोजनाओं, सीमेंट उद्योगों और प्रदूषण का दंश झेल रहा है। इसके बावजूद ग्रीनको सहित कई बड़ी पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाओं के लिए वन क्षेत्रों को चिन्हित किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि इन परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की गई तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों तक दिखाई देगा।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब सरकार हर वर्ष वृक्षारोपण पर हजारों करोड़ रुपये खर्च करने का दावा करती है, तो फिर सोनभद्र का वन क्षेत्र लगातार क्यों घट रहा है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक जंगलों की क्षति की भरपाई केवल कहीं और पौधे लगाकर नहीं की जा सकती।
युवा कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि स्थानीय ग्रामीणों, आदिवासियों और वनाधिकार धारकों की चिंताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन जंगलों पर वर्षों से स्थानीय समुदायों की आजीविका निर्भर रही है, उन्हें बिना व्यापक जनसहमति के कॉर्पोरेट परियोजनाओं के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है।
मृदुल मिश्रा ने मांग की कि प्रस्तावित पम्प्ड स्टोरेज एवं औद्योगिक परियोजनाओं का स्वतंत्र और पारदर्शी पर्यावरणीय आकलन कराया जाए। साथ ही वन भूमि विचलन और पेड़ों की कटाई से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं तथा ग्राम सभाओं की सहमति और वनाधिकार कानून का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने पिछले दस वर्षों में हुए वन क्षेत्र के नुकसान और वृक्षारोपण पर हुए खर्च का श्वेत पत्र जारी करने की भी मांग की।
उन्होंने कहा कि जब तक पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तब तक संवेदनशील वन क्षेत्रों में नई परियोजनाओं की स्वीकृति पर रोक लगाई जानी चाहिए।
मृदुल मिश्रा ने कहा कि सोनभद्र केवल खनिज और बिजली उत्पादन का केंद्र नहीं, बल्कि प्रदेश की महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर है। उन्होंने कहा कि जंगल, जल, जमीन और स्थानीय लोगों के अधिकारों को नुकसान पहुंचाने वाले विकास मॉडल को स्वीकार नहीं किया जा सकता और युवा कांग्रेस लोकतांत्रिक तरीके से जनता के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।

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