कर्नाटक में वोटरों में से एक पांचवां वोटर मतदाता सूची से निकाला गया

कर्नाटक में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के बाद मतदाता सूची में लगभग 1 करोड़ वोटर निकाल दिए गए हैं। राज्य के कुल मतदाताओं में से लगभग 20% वोटरों को अंतिम मतदाता सूची से हटाया गया है, जो मंगलवार को जारी की गई। यह जानकारी कर्नाटक के मुख्य चुनाव अधिकारी वी. अंबुकुमार ने दी।
SIR के बाद कर्नाटक में कुल पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 4.54 करोड़ से अधिक रह गई है। इस प्रक्रिया से पहले यह संख्या 5,54,32,314 थी, जिसका मतलब है कि कुल 99,32,303 मतदाता सूची से हटाए गए।
मतदाता संख्या और लिंग अनुपात
मुख्य चुनाव अधिकारी के अनुसार, वर्तमान में कर्नाटक में कुल 4,55,00,011 वोटर हैं, जिनमें 2,25,83,107 पुरुष, 2,29,14,063 महिला और 2,841 अन्य हैं। राज्य में प्रत्येक 1,000 पुरुष वोटरों पर 1,017 महिला वोटर हैं।
मतदाता सूची में यह बदलाव ऐसे समय में आया है, जब कई राजनीतिक दलों ने SIR प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है। कर्नाटक की सत्ताधारी कांग्रेस दल ने इस पर आरोप लगाया है कि वोटरों की संख्या जानबूझकर कम की गई है।
राजनीतिक विवाद और आरोप
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल भाजपा ने मतदाताओं को हटाने के लिए कई अवैध गतिविधियां की हैं। उन्होंने कहा कि विशेषकर मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म 7 के दुरुपयोग की खबरें मिली हैं। यह फॉर्म वोटर्स के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
शिवकुमार ने कहा, “कर्नाटक सरकार और पार्टी की जिम्मेदारी है कि वे हर वोटर के अधिकार की सुरक्षा करें।” दूसरी ओर, मुख्य चुनाव अधिकारी अंबुकुमार ने चुनाव प्रक्रिया में किसी भी अनियमितता से इनकार किया है। उन्होंने बताया कि 60,000 से अधिक नाम अधिकारियों द्वारा हटाए गए, जो नियम के अनुसार किया गया।
अंबुकुमार ने बताया कि फॉर्म 7 की जांच में जिन लोगों को असमर्थ पाया गया, उनके नाम हटाने की कार्रवाई की गई और ये सभी कदम आधिकारिक प्रक्रिया के तहत पूरे पारदर्शिता के साथ लिए गए।
SIR प्रक्रिया और विरोध
SIR डेटा के अनुसार, जून के मध्य में 5.54 करोड़ से अधिक मतदाताओं में से सिर्फ 4.46 करोड़ ने बूथ स्तर के अधिकारियों को हस्ताक्षरित फॉर्म दिए। बाकी 1.07 करोड़ फॉर्म गैर लौटे और उन्हें अनुपस्थित, स्थानांतरण, मृत एवं डुप्लीकेट के तहत वर्गीकृत किया गया। इसमें 65.45 लाख निवासी स्थायी रूप से स्थानांतरित बताए गए, 19 लाख अनुपस्थित, 16.39 लाख मृत और 7.09 लाख डुप्लीकेट नाम थे।
मुख्य चुनाव अधिकारी ने कहा कि कई आवेदन अभी भी लंबित हैं और लोग सत्यापन के बाद सूची में शामिल हो सकते हैं। इस प्रक्रिया को लेकर विवाद तब और बढ़ा जब पश्चिम बंगाल चुनावों के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए, जो कर्नाटक सहित कई राज्य तक फैल गए।




