फलावियो बोल्सोनारो अमेरिका पहुंचे, रिपोर्ट्स में कहा गया

ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के पुत्र और हारे हुए राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार फलावियो बोल्सोनारो 27 अक्टूबर 2026 को अमेरिका पहुंच गए। यह जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स में अज्ञात सूत्रों के हवाले से दी गई है। यह यात्रा उनके देश छोड़ने पर लगी सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद हुई है।
फलावियो बोल्सोनारो का अमेरिका पहुंचना
CNN और द वाशिंगटन पोस्ट ने बताया कि फलावियो बोल्सोनारो मंगलवार देर रात अमेरिका पहुंचे, लेकिन उनकी लैंडिंग स्थल की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। ब्राजील के सर्वोच्च अदालत ने फलावियो के चुनाव अभियान में कथित विदेशी फंडिंग और सोशल मीडिया पर हस्तक्षेप की जांच के आदेश दिए हैं।
फलावियो का चुनाव हाल ही में हुआ था जिसमें उन्होंने मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा से हार का सामना किया था। हार के बाद भी उन्होंने अपनी हार स्वीकार नहीं की।
चुनाव हार और कानूनी कार्यवाही
फलावियो बोल्सोनारो पर भ्रष्टाचार और पैसा धोखाधड़ी के आरोपों की जांच जारी है। चुनाव हारने के बाद वे संसदीय प्रतिरक्षा भी खो देंगे, जिससे कानूनी कार्रवाई और तीव्र हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके पासपोर्ट जब्त करने के निर्देश भी दिए थे।
ब्राजील पुलिस सूत्र के अनुसार, उनके ब्राजीलियाई और डिप्लोमेटिक पासपोर्ट रद्द कर दिए गए हैं। हालांकि, उनकी देश छोड़ने की कोई औपचारिक रिकॉर्ड नहीं मिली है। इस बीच, यूएस स्टेट डिपार्टमेंट ने बोल्सोनारो और उनके परिवार को वीजा जारी करने की जानकारी दी है लेकिन उनकी यात्रा की पुष्टि नहीं की।
फलावियो के अभियान प्रबंधक रोजेरियो मारिन्हो ने कहा कि उन्हें उनके ठिकाने की अभी कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि फलावियो ने उन्हें केवल यह संदेश भेजा था कि वे कुछ समय बाद बातचीत करेंगे।
ब्राजील के राष्ट्रपति लूला ने फलावियो की जल्दी देश छोड़ने की हरकत को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपने देश से छिपकर निकलता है, उसे कुछ छिपाने के लिए होता है।
पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो, जो वर्तमान में जेल में हैं, और उनके पुत्र फलावियो के चुनाव हार के बाद राजनीतिक संकट के बीच, डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने भी भारतीय पूर्व राष्ट्रपति को न्यायिक उत्पीड़न का शिकार बताया था। ट्रम्प ने ब्राजील चुनाव को “ठग” करार दिया, लेकिन इसके कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए।
अंत में, सुप्रीम कोर्ट ने फलावियो की कैंपेन में विदेशी हस्तक्षेप और सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स के कथित दखल के मामले में जांच का आदेश भी दिया है। साथ ही, मकैनिकल गड़बड़ी के कारण निश्चित चुनाव संबंधी विज्ञापनों को भी निष्क्रिय करने का मुद्दा उठा है, जिसकी पुष्टि मेाटा (व्हाट्सएप, फेसबुक की मातृ कंपनी) ने खारिज की है।




