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अमित शाह का पंजाब में NDA सरकार बनने पर जोर, अकाली दल वापसी की चर्चा

हरियाणा के अंबाला में एक मंच से बोलते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब के किसानों और आगामी चुनाओं पर जोर दिया। उन्होंने पंजाब के लोगों से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार बनाने का आह्वान किया। शाह ने कहा कि वे इन दिनों पंजाब में किसान आंदोलन के प्रति जागरूकता लेकर घूम रहे हैं, जहां किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी की मांग की है।

पंजाब चुनाव में NDA सरकार का संकेत

अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने किसानों को MSP की गारंटी का झूठा वादा दिया और केवल खिलौना सरगम बांटा। उन्होंने हरियाणा की बात करते हुए कहा कि वहां के मुख्यमंत्री नैय़ब सिंह सैनी की सरकार 24 फसलों पर MSP की खरीद कर रही है। इसके बाद उन्होंने पंजाब के लोगों से भाजपा को सत्ता में लाने को कहा। हालांकि बाद में उन्होंने तुरंत अपनी बात सुधारते हुए कहा कि उन्हें NDA को वोट देना चाहिए।

यह बदलाव पंजाब में राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि वर्तमान में भाजपा का पंजाब में कोई गठबंधन नहीं है। इस राज्य में पहले मात्र शिरोमणि अकाली दल (SAD) NDA का हिस्सा था। भाजपा के राज्य मीडिया प्रमुख विनीत जोशी ने कहा कि पार्टी 117 सभी सीटों पर खुद चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है, जबकि एक वरिष्ठ नेता ने संभावनाओं पर कोई पूरी बात करने से बचा।

भाजपा और अकाली दल के बीच टूट का इतिहास

1990 के दशक के मध्य से भाजपा और अकाली दल करीब 25 वर्षों तक साथ में रहे। इस गठबंधन में अकाली दल ने किसान वर्ग का समर्थन हासिल किया जबकि भाजपा ने शहरी व्यापारियों और हिंदू मतदाताओं का आधार बनाया। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने केवल 23 सीटों पर चुनाव लड़ा था।

संबंध सितंबर 2020 में टूट गया जब अकाली दल ने केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध में NDA से अलगाव किया। किसान आंदोलन के बाद ये कानून वापस भी लिए गए। इसके बाद दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़े। 2022 के विधानसभा चुनाव में SAD और BJP दोनों के हासिल किए गए जीत के आंकड़े कमतर रहे। SAD ने केवल तीन और BJP ने दो सीटें जीतीं।

2024 के लोकसभा चुनाव में BJP का वोट शेयर बढ़ा लेकिन कोई सीट नहीं मिली, वहीं SAD केवल बठिंडा सीट जीत पाया। अकाली दल का वोट प्रतिशत लगभग 13 प्रतिशत रह गया, जबकि BJP का लगभग 18.5 प्रतिशत तक पहुंचा।

MSP की मांग पंजाब के किसानों के लिए प्रमुख मुद्दा है और भाजपा उस पर जवाब देगी तभी वह पंजाब के ग्रामीण इलाकों मालवा और मज़ा में अपनी पकड़ बना सकेगी। अकाली दल यदि वापस NDA में आता है तो इससे भाजपा को किसानों का समर्थन प्राप्त होने की संभावनाएं बढ़ेंगी।

हालांकि अभी तक दोनों पक्षों ने कोई गठबंधन घोषणा नहीं की है, परन्तु अमित शाह का “भाजपा” से “NDA” बोलना पंजाब की राजनीतिक फिज़ा में खास असर छोड़ रहा है। इस बात से पंजाब में भाजपा और अकाली दल की वापसी की चर्चा तेज हो गई है।

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