उत्तर प्रदेश चुनाव 2027: अखिलेश यादव ने चुनाव न लड़ने का किया फैसला

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनावों की तैयारियां तेज होती जा रही हैं और इसी बीच समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने चुनाव न लड़ने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा है कि वे पूरे राज्य में प्रचार करेंगे और 403 सीटों पर अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतारेंगे।
अखिलेश का चुनाव न लड़ने का कारण
अखिलेश यादव ने इस निर्णय के पीछे शुभ और अशुभ संकेतों को बताया। उन्होंने 2012 के चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौरान वे लोकसभा सांसद थे और उनकी पार्टी बहुमत के साथ सत्ता में आई। वहीं, 2022 में वे खुद चुनाव लड़कर जीत गए पर पार्टी सरकार नहीं बना सकी। इस अनुभव को ध्यान में रखते हुए उन्होंने चुनाव न लड़ने का निर्णय लिया है।
समाजवादी पार्टी के सूत्रों के मुताबिक, अगर अखिलेश चुनाव लड़ते हैं तो उनका अधिकांश समय अपनी सीट पर प्रचार करने में लगेगा, जबकि वे पूरे राज्य में प्रचार करना चाहते हैं। इससे पार्टी के उम्मीदवारों को उनका समर्थन मिलेगा।
भाजपा का जवाब और चुनावी रणनीति
उत्तर प्रदेश भाजपा ने अखिलेश यादव के चुनाव न लड़ने के फैसले पर कटाक्ष किया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने सोशल मीडिया पर उन्हें ‘रांछोड़ अखिलेश’ कहा और चुनावी मैदान से भागने का आरोप लगाया। वहीं, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी कहा कि समाजवादी पार्टी हार को पहले ही मान चुकी है।
वहीं, समाजवादी पार्टी की प्रवक्ता पूजा शुक्ला ने भाजपा की बातों को खारिज करते हुए कहा कि अखिलेश पार्टी के सबसे बड़े स्टार प्रचारक हैं और उन्हें राज्य के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार करना जरूरी है। पार्टी उनके निर्णय के साथ खड़ी है।
उत्तर प्रदेश के इतिहास में कई मुख्यमंत्री ऐसे रहे हैं जिन्होंने चुनाव लड़े बिना सरकार संभाली है। यह परंपरा पहले भी चली है, जिनमें मायावती और राजनाथ सिंह के नाम शामिल हैं।
2022 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर अर्बन से चुनाव लड़ा और जीतकर दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। आगामी चुनाव में भाजपा उनकी सीट और दोनों उपमुख्यमंत्री के चुनाव लड़ने की योजना पर काम कर रही है।
केंद्र में भाजपा की रणनीति है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी चुनाव लड़ें। जबकि मौर्य पिछली बार सिराथू से हार गए थे, वे इस बार प्रयागराज नॉर्थ या फाफमऊ जैसी सीटों पर चुनाव लड़ने की संभावना तलाश रहे हैं।
यह चुनावी तैयारी इस संभावना को दर्शाती है कि भाजपा सत्ता बनाए रखने की पुरजोर कोशिश कर रही है, जबकि समाजवादी पार्टी भी अपनी रणनीति के साथ पूरी ताकत लगा रही है। अखिलेश यादव का चुनाव न लड़ना चुनावी मैदान में उनकी विशिष्ट भूमिका को दर्शाता है।




