छात्र एक साथ अधिक योग्य और कम तैयारी वाले कैसे हैं

भारत में छात्र आज अधिक प्रमाण पत्र के साथ स्नातक कर रहे हैं, लेकिन वे कामकाजी दुनिया की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं। यह विरोधाभास भारत के रोजगार योग्यपन की समस्या को उजागर करता है, जहां योग्यताओं की संख्या तैयारी से अधिक तेज़ी से बढ़ रही है।
प्रमाणपत्रों के बावजूद तैयारी में कमी
हाल के वर्षों में, ऑनलाइन कोर्स और शॉर्ट टर्म सर्टिफिकेशन की उपलब्धता बढ़ने से छात्रों ने डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल मार्केटिंग और AI टूल्स जैसे क्षेत्रों में कई प्रमाण पत्र अर्जित किए हैं। हालांकि, इन कौशलों का व्यावहारिक उपयोग करने में कई युवा असमर्थ दिखते हैं। असल जीवन की जटिल व्यावसायिक समस्याओं को समझना और उनका समाधान करना छात्रो के लिए चुनौती बन रहा है।
इंडिया स्किल्स रिपोर्ट 2025 के अनुसार, केवल 54.8% भारतीय स्नातक वास्तव में रोजगार के लिए उपयुक्त हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में मामूली सुधार दर्शाता है। यह आंकड़ा शिक्षा प्रणाली में गहरे बदलाव की आवश्यकता को दर्शाता है क्योंकि तकनीकी कौशल के साथ-साथ व्यावहारिक समझ भी आवश्यक है।
रोजगार में बाधाएं और सुधार की दिशा
भर्ती प्रबंधकों के अनुसार, तकनीकी ज्ञान के बजाय समस्या को समझने और अनिश्चित परिस्थितियों में काम करने की क्षमता में कमी है। छात्र आमतौर पर साफ-सुथरे प्रश्नों को हल करने के लिए प्रशिक्षित होते हैं, जबकि वास्तविक संगठनात्मक समस्याएं मिश्रित और जटिल होती हैं।
इसके अलावा, अस्पष्टता के साथ कार्य करने, टीम में सहयोग बढ़ाने और असफलताओं से सीखने की क्षमता भी अभाव है। ये क्षमताएं वर्तमान शिक्षा प्रणाली में अपेक्षित रूप से नहीं विकसित हो पाती हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और AICTE की पहलों ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए इंटरडिसिप्लिनरी और परियोजना आधारित सीखने को बढ़ावा दिया है। उद्योग और शिक्षा प्रतिष्ठानों के बीच बेहतर समन्वय और छात्रों को व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
परिणामस्वरूप, केवल प्रमाण पत्रों पर जोर देने के बजाय व्यापक सोच, निर्णय लेने की क्षमता और व्यवहारिक ज्ञान को बढ़ावा देना आवश्यक है। शिक्षा की गुणवत्ता तभी मानी जाएगी जब छात्र वास्तविक दुनिया की समस्याओं से निपटने में सक्षम होंगे।
भारत में रोजगार योग्यपन की समस्या का समाधान तभी होगा जब शिक्षा प्रणाली केवल योग्यता की संख्या बढ़ाने की बजाय असली कौशल और समझ विकसित करने पर केंद्रित होगी। इसी से छात्र न केवल अधिक योग्य बनेगें बल्कि वास्तविक कार्य के लिए पूरी तरह तैयार भी होंगे।




