साइकट मजुमदार की किताब Open Intelligence पर एक साक्षात्कार

साइकट मजुमदार की नई किताब Open Intelligence: Education Between Art and Artificial में उन्होंने शिक्षा और कला के बीच बढ़ते कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभाव को लेकर महत्वपूर्ण विचार साझा किए हैं। यह किताब इस दौर की शिक्षा और इंसानियत के नए मापदंड स्थापित करती है, जहां मानवता और तकनीक का संगम अब अनिवार्य हो चुका है।
बहुआयामी बुद्धिमत्ता और शिक्षा का नया स्वरूप
मजुमदार ने बताया कि शिक्षा में सिर्फ भाषाई और संख्यात्मक बुद्धिमत्ता पर ध्यान देना अब पर्याप्त नहीं है। हमें शारीरिक, नैतिक, सामाजिक और संगीतात्मक बुद्धिमत्ता जैसे पहलुओं को भी जोड़ना होगा। जैसे कि AI वैज्ञानिक जेफरी हिंटन ने कहा, जिन कामों में शारीरिक और वैचारिक दोनों कौशलों का संयोजन होता है, वे तकनीक के लिए चुनौती बने रहेंगे। इसलिए शिक्षा का समग्र और बहुआयामी होना ज़रूरी है ताकि विद्यार्थी अपनी विशिष्टता पहचान सकें।
उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश में छात्र अपनी रुचियों और क्षमताओं के मिश्रण वाले व्यक्तित्व के साथ बड़े हैं, लेकिन शिक्षा प्रणाली उन्हें केवल एक ही रास्ते पर ले जाती है। नई लिबरल आर्ट्स शिक्षा प्रणाली में जैसे कंप्यूटर साइंस के साथ संगीत या अर्थशास्त्र के साथ भाषाएं जोड़ने को प्रोत्साहित किया जाता है, जो काम के क्षेत्र में लोगों को विशिष्ट बनाता है। AI के युग में ये कौशल लोगों को प्रतिस्पर्धा में बनाए रखेंगे।
व्यक्तित्व और सामूहिकता का संतुलन
किताब में मजुमदार कहते हैं कि स्वतंत्र सोच और व्यक्तिवाद की शिक्षा विकास के लिए जरूरी है, लेकिन भारतीय जैसे सामूहिक समाजों में यह चुनौतीपूर्ण होता है। यहां पर व्यक्ति के अधिकार और समुदाय के हित के बीच संतुलन बनाना ज़रूरी है। शिक्षा प्रणाली को इस विविधता को समझकर ऐसे मॉडल अपनाने चाहिए जो परंपरा और आधुनिकता दोनों को साथ लेकर चलें।
मजुमदार ने यह भी बताया कि AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच सामाजिक चेतना और कथात्मक बुद्धिमत्ता को विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। कहानी बनाना और अपनी राय देना मानव बुद्धिमत्ता की एक ऐसी खासियत है जो मशीनों से अलग बनाती है। सही वक्त के भीतर यह कौशल इंसानी पहचान को कायम रखने में मदद करता रहेगा।
लेखक ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे AI का इस्तेमाल शोध और डेटा संग्रह में करते हैं, लेकिन अपने लेखन में वे अभी भी पारंपरिक पद्धति को प्राथमिकता देते हैं। उन्हें लगता है कि AI अभी उनकी रचनात्मकता की जगह नहीं ले सकता।
तकनीकी और मानवीय क्षेत्रों के बीच खाई को पाटने की जरूरत पर मजुमदार ने कहा कि तकनीकी शिक्षा में भी सामाजिक और नैतिक चेतना को शामिल करना संभव है। प्रोफेशनल फील्ड में नैरेटिव इंटेलिजेंस स्वाभाविक रूप से काम करती है, उदाहरण के लिए डॉक्टरों और वकीलों के मामले में।
उन्होंने जोर दिया कि मानवीय दृष्टिकोण को तकनीकी शिक्षा और प्रोफेशनल कामों में समाहित करना अब केवल एक आदर्श नहीं बल्कि हमारी अस्तित्व रक्षा का जरूरी कदम है। AI और शिक्षा के इस युग में यह मानवता को बचाए रखने की अंतिम उम्मीद हो सकती है।
किताब में व्यक्त विचारों और आधुनिक शिक्षा के प्रति अहम सुझावों के साथ, मजुमदार ने यह स्पष्ट किया है कि कैसे शिक्षा के माध्यम से हम अपनी इंसानी खूबियों को बनाए रख सकते हैं और तकनीक के साथ संतुलित विकास कर सकते हैं।




