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👉 शिकायत में नामजद अधिकारियों तक पहुंचा मामला
👉 प्रशासनिक कार्रवाई की मांग हुई तेज
लखनऊ/अमेठी। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय में 17 दिसंबर को हुए विवाद को लेकर मामला अब गंभीर होता जा रहा है। लिपिक विकास तिवारी द्वारा यू.पी. एजुकेशनल मिनिस्ट्रियल ऑफिसर्स एसोसिएशन, जनपद अमेठी के माध्यम से बीएसए को सौंपे गए विधिवत लिखित शिकायती पत्र के बाद यह प्रकरण प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गया है।
शिकायत पत्र की प्रतिलिपि जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, मुख्य विकास अधिकारी, शिक्षा निदेशक सहित मंडल और प्रदेश स्तर के अधिकारियों को भेजी गई है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
शिकायत के अनुसार, 17 दिसंबर 2025 को लिपिक विकास तिवारी बीएसए कार्यालय में निर्धारित प्रक्रिया के तहत चार्ज हस्तांतरण के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान उनके कक्ष में प्रांतीय शिक्षक संगठन के पदाधिकारी पहुंचे, जहां कहासुनी के बाद गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया है।
लिपिक विकास तिवारी ने घटना की जानकारी तत्काल दूरभाष के माध्यम से बीएसए को दी, जिस पर शांति बनाए रखने के निर्देश दिए गए। संघ पदाधिकारियों द्वारा दिए गए शिकायती पत्र में स्पष्ट किया गया है कि लिपिक अपने शासकीय दायित्वों का निर्वहन कर रहे थे और उनकी ओर से किसी प्रकार की अनुचित या उकसावे वाली कार्रवाई नहीं की गई।
मामले से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यदि जिला स्तर पर समय रहते उचित कार्रवाई नहीं होती है, तो प्रकरण उच्च स्तर पर स्वतः संज्ञान में लिया जा सकता है। कर्मचारियों के बीच यह भी चर्चा है कि जब जिला मुख्यालय स्थित बीएसए कार्यालय में इस तरह की स्थिति उत्पन्न हो रही है, तो अन्य कार्यालयों की कार्यसंस्कृति पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
गौरतलब है कि इस विवाद को लेकर पहले भी समाचार पत्रों में खबर प्रकाशित हो चुकी है, जिसमें दोनों पक्षों के आरोप सामने आए थे। अब लिपिक की लिखित शिकायत के साथ मामला दस्तावेजी रूप में दर्ज हो चुका है।
बीएसए संजय कुमार तिवारी ने बताया कि प्रकरण उनके संज्ञान में है। लिखित शिकायत मिलने के बाद पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यालयीन अनुशासन सर्वोपरि है और जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारियों और शिक्षकों का कहना है कि बीएसए कार्यालय परिषदीय विद्यालयों का शीर्ष कार्यालय होता है। ऐसे में यहां अनुशासन और कार्यशैली पर उठे सवालों का समयबद्ध और पारदर्शी समाधान जरूरी है, ताकि पूरे विभाग में विश्वास और अनुशासन बना रहे।
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