लखनऊ

लखनऊ के राष्ट्र प्रेरणा स्थल का म्यूजियम जरुर देखें, भारतीय राष्ट्रवाद की वैचारिक यात्रा का दस्तावेज

Rastra Prerna Sthal Lucknow: भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती पर राष्ट्र प्रेरणा स्थल को राष्ट्र को समर्पित किया गया है। इसमें अटल जी 1952 की हार से प्रधानमंत्री तक की पूरी यात्रा को दिखाया गया है।

HighLights

  1. 1952 की हार से पीएम तक, अटल जी की पूरी यात्रा दिखाएगा राष्ट्र प्रेरणा स्थल
  2. म्यूजियम में प्रदर्शित जेल जिसमें बंद थे श्यामा प्रसाद मुखर्जी
  3. चौथी गैलरी में पं. दीन दयाल उपाध्याय के विचारों पर केंद्रित
  4. लखनऊ के डंपिंग ग्राउंड से राष्ट्र का प्रेरणा स्थल

राजधानी लखनऊ का राष्ट्र प्रेरणा स्थल परिसर युवाओं के लिए भारतीय राष्ट्रवाद की वैचारिक यात्रा का दस्तावेज है। इसको शुक्रवार से जनता के लिए खोला जाएगा। यहां पर भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के साथ पंडित दीनदयाल उपाध्याय और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 65-65 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं।

भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती पर राष्ट्र प्रेरणा स्थल को राष्ट्र को समर्पित किया गया है। इसमें अटल जी 1952 की हार से प्रधानमंत्री तक की पूरी यात्रा को दिखाया गया है। वह अपनी राजनीति प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते थे। यह उनका असाधारण व्यक्तित्व ही था कि तत्कालीन पंडित नेहरू ने यह तक दिया था कि वह आने वाले समय में प्रधानमंत्री जरूर बनेंगे। उनके साथ ही राष्ट्र प्रेरणा स्थल के म्यूजियम में पंडित दीनदयाल उपाध्याय और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन वृत को प्रदर्शित किया गया है।

लुभाती है राष्ट्र प्रेरणा स्थल की भव्यता

राष्ट्र प्रेरणा स्थल स्मारक से आगे भारतीय राष्ट्रवाद की वैचारिक यात्रा का दस्तावेज भी है। भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चिंतक पंडित दीन दयाल उपाध्याय और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित यह स्थल उन विचारों को एक सूत्र में पिरोता है, जिन्होंने स्वतंत्र भारत की राजनीति और संस्कृति पर काफी असर डाला है। इसका 98 हजार वर्ग फुट में फैला म्यूजियम ब्लॉक पहली नजर में ही भव्यता से प्रभावित करता है। म्यूजियम की पहली गैलरी ओरिएंटेशन रूम के रूप में तैयार की गई है। यहां ऑडियो-विजुअल माध्यम से तीनों राष्ट्र नायकों के जीवन के अहम पड़ाव दिखाए जाएंगे। आसान भाषा, प्रभावी दृश्य और तकनीक का संतुलन इस गैलरी को खास बनाता है।

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म्यूजियम की गैलरी अटल जी को समर्पित

राष्ट्र प्रेरणा स्थल स्मारक की गैलरी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित है। पांचवीं गैलरी में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की कविताएं, भाषणों की झलकियां और राजनीतिक जीवन के अहम क्षण दिखाए गए हैं। इसमें उनके जीवन के वृतांत के साथ ही उनके भाषणों का ऑडियो भी सुना जा सकता है। उनके विचार युवाओं को प्रेरित करेंगे।

म्यूजियम में प्रदर्शित जेल जिसमें बंद थे श्यामा प्रसाद

म्यूजियम की दूसरी गैलरी भारतीय जनसंघ के निर्माण और विकास को समर्पित है। यहां से राष्ट्रवाद की राजनीतिक धारा को समझने का रास्ता खुलता है। फोटो, दस्तावेज और अखबारों की कटिंग यह बताती हैं कि कैसे एक वैचारिक आंदोलन ने संगठित राजनीतिक रूप लिया।

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कश्मीर से लेकर राष्ट्रीय एकता

तीसरी गैलरी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को समर्पित है। यहां उनके संघर्ष, सिद्धांत और बलिदान को सिलिकॉन मूर्तियों, दुर्लभ तस्वीरों और दस्तावेजों के जरिए दिखाया गया है। कश्मीर से लेकर राष्ट्रीय एकता तक उनके विचारों को सरल भाषा में समझाया गया है। यहां फोटो में उस जेल को प्रदर्शित किया गया है जहां मुखर्जी बंद थे।

चौथी गैलरी पं. दीन दयाल उपाध्याय के विचारों पर केंद्रित

चौथी गैलरी पं. दीन दयाल उपाध्याय के विचारों पर केंद्रित है। एकात्म मानववाद को यहां सिर्फ सिद्धांत नहीं, बल्कि जीवन दर्शन के रूप में प्रस्तुत किया गया है। दीवारों पर उकेरे गए उद्धरण और दृश्य यह समझाते हैं कि राजनीति का उद्देश्य सिर्फ विकास नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना है। यह गैलरी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की आत्मा को छूती है।

फर्स्ट फ्लोर पर बना भारत माता कोर्टयार्ड

म्यूजियम के पांच कोर्टयार्ड इसे खुलापन और प्रतीकात्मक गहराई देते हैं। फर्स्ट फ्लोर पर बना भारत माता कोर्टयार्ड खास आकर्षण है। यहां दस फीट ऊंची भारत माता की प्रतिमा और दीवार पर अंकित वंदे मातरम राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करता है। फर्स्ट फ्लोर के अन्य दो कोर्टयार्ड में जनसंघ के प्रतीक चिह्न दीपक और सुदर्शन चक्र की प्रतिकृतियां हैं। दीपक विचारों की रोशनी का प्रतीक है, जबकि सुदर्शन चक्र न्याय और धर्म की रक्षा का संकेत देता है। दूसरे फ्लोर के कोर्टयार्ड में राष्ट्र नायकों द्वारा इस्तेमाल किए गए तख्त, प्रिंटिंग मशीन, मेज-कुर्सी और छड़ी प्रदर्शित हैं। म्यूजियम के एक कोर्टयार्ड में प्रदर्शित प्रिंटिंग मशीन जिसके जरिए स्वतंत्रता सेनानी अपने पक्ष में प्रचार के लिए पर्चे-अखबार छापा करते थे।

म्यूजियम की 12 इंटरप्रिटेशन वॉल्स भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और महान विभूतियों की कहानी कहती हैं. म्यूरल और रिलीफ आर्ट के जरिए इतिहास को दृश्य रूप दिया गया है। यह कला और इतिहास का ऐसा मेल है, जो हर उम्र के दर्शक को पूरी तरह से जोड़ता है। म्यूजियम ब्लॉक में बना वीवीआईपी ग्रीन रूम आधिकारिक आयोजनों के लिए तैयार किया गया है। इससे पता चलता है कि यह स्थल सिर्फ स्मृति नहीं, बल्कि सक्रिय सार्वजनिक संवाद का केंद्र भी बनेगा। म्यूजियम की सबसे बड़ी खासियत इसकी सरल भाषा और समावेशी प्रस्तुति है। यहां इतिहास को बोझ नहीं, बल्कि प्रेरणा के रूप में वस्तुओं को रखा गया है।

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