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‘विकसित भारत के लिए मानव पूंजी पर फोकस’, मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन में बोले पीएम मोदी

 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को राजधानी दिल्ली में आयोजित मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता की। इस दौरान शासन और सुधारों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर गहन और सार्थक चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने इसे केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को राजधानी दिल्ली में आयोजित मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता की। इस दौरान शासन और सुधारों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर गहन और सार्थक चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने इसे केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा, “दिल्ली में आयोजित मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान शासन और सुधारों से जुड़े विभिन्न विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।” अधिकारियों के अनुसार, यह सम्मेलन राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं पर केंद्र और राज्यों के बीच संरचित तथा सतत संवाद का एक अहम मंच बनकर उभरा है।

सम्मेलन में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा और शक्तिकांत दास, कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन, नीति आयोग के सदस्य तथा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव शामिल हुए।

केंद्र सरकार के मंत्रालयों, विभागों, नीति आयोग, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया गया।इस वर्ष सम्मेलन का मुख्य विषय ‘विकसित भारत के लिए मानव पूंजी’ रखा गया है।

इसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अपनाई जा सकने वाली श्रेष्ठ प्रक्रियाओं और रणनीतियों पर चर्चा हो रही है। खास तौर पर पांच प्रमुख क्षेत्रों- प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा, स्कूली शिक्षा, कौशल विकास, उच्च शिक्षा, खेल एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों- पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

सम्मेलन की रूपरेखा के अनुसार, सप्ताहांत में छह विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें राज्यों में डी-रेगुलेशन, शासन में तकनीक के अवसर और जोखिम, स्मार्ट सप्लाई चेन व बाजार संपर्क के लिए एग्रीस्टैक, ‘एक राज्य-एक विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल’, आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी, तथा वामपंथी उग्रवाद मुक्त भविष्य की योजनाओं पर चर्चा शामिल है।

इसके अलावा, विरासत और पांडुलिपियों के संरक्षण व डिजिटलीकरण तथा ‘आयुष फार आल’ के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में पारंपरिक ज्ञान के एकीकरण जैसे विषयों पर भी केंद्रित विमर्श किया जाएगा।

प्रधानमंत्री के सहकारी संघवाद के विजन पर आधारित यह सम्मेलन केंद्र और राज्यों को एक साझा रोडमैप तैयार करने का अवसर देता है, जिससे भारत की मानव पूंजी का अधिकतम उपयोग हो सके और समावेशी व भविष्य-उन्मुख विकास को गति मिले।

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