मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन करेगा विहिप
केजीएमयू प्रशासन पर कार्रवाई की मांग, आंशिक सहमति के बाद भी चेतावनी

सब तक एक्सप्रेस।
लखनऊ। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने केजीएमयू प्रशासन के समक्ष रखी गई मांगों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। विहिप के आह्वान पर हनुमान चालीसा पाठ और कुलपति का पुतला दहन प्रस्तावित था, लेकिन आंदोलन से पहले ही केजीएमयू प्रशासन ने छह सूत्रीय मांगों में से तीन पर तत्काल सहमति जता दी, जबकि शेष मांगों पर समय मांगा है।
विहिप के संगठन मंत्री समरेंद्र प्रताप ने कहा कि यदि शेष मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन आंदोलन करेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ी तो कुलपति का पुतला दहन किया जाएगा और बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा, चाहे इसके लिए राजभवन तक कूच क्यों न करना पड़े।
विहिप ने बताया कि हाल ही में संगठन द्वारा दिए गए ज्ञापन के बाद रमीज उद्दीन नायक को हिंदू बालिका के साथ दुर्व्यवहार और अन्य गंभीर आरोपों के चलते निलंबित किया गया है, लेकिन यह कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। संगठन ने मांग की कि संबंधित व्यक्ति को ब्लैकलिस्ट कर विश्वविद्यालय से उसका प्रवेश निरस्त किया जाए, क्योंकि उसके कृत्य से विश्वविद्यालय की छवि धूमिल हुई है।
संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा गठित जांच समिति पर भी सवाल उठाए और कहा कि ऐसे गंभीर मामलों की निष्पक्ष जांच विश्वविद्यालय स्तर पर संभव नहीं है। विहिप ने मांग की कि समिति को भंग कर प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर मामले की जांच एसटीएफ या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए।
इसके अलावा सैयद अख्तर अब्बास को सेवानिवृत्ति के बाद भी विश्वविद्यालय में दायित्व दिए जाने पर आपत्ति जताई गई। विहिप ने उन्हें तत्काल कुलपति के ओएसडी पद से हटाने और उनकी नियुक्ति व आरोपों की जांच किसी स्वतंत्र सरकारी एजेंसी से कराने की मांग की।
विहिप ने यह भी मांग की कि प्रोफेसर वाहिद अली को निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए फैकल्टी/लैब इंचार्ज पद से हटाया जाए, ताकि साक्ष्यों से छेड़छाड़ और गवाहों पर दबाव की आशंका न रहे।
संगठन ने महिलाओं से जुड़े मामलों की जांच के लिए बाहरी सदस्यों वाली समिति गठित करने, महिला आयोग के सदस्य, सेवानिवृत्त आईएएस/पीसीएस और सेवानिवृत्त न्यायाधीश को शामिल करने तथा पुलिस को अनिवार्य रूप से सूचित करने की मांग की। साथ ही आउटसोर्सिंग के माध्यम से हो रही नियुक्तियों की भी स्वतंत्र जांच कराने की मांग उठाई गई।
विहिप ने स्पष्ट किया कि यदि मांगों पर शीघ्र और उचित कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।



