आंख मलने की आदत से कॉर्निया को हो सकता है नुकसान, डॉक्टर ने समझाया कारण

आंख मलना एक आम प्रतिक्रिया है जब आंखें सूखी, खुजली या थकी हुई होती हैं, लेकिन लगातार या जोर से आंखें मलना नुकसानदायक हो सकता है। पुणे के वेंसर हॉस्पिटल के कंसल्टेंट ऑप्थेल्मोलॉजिस्ट डॉ. शरून शितोले के अनुसार, बार-बार आंखें मलना कोर्निया को नुकसान पहुंचा सकता है और दृष्टि संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है।
बार-बार आंख मलने की समस्या और उसके खतरे
डॉ. शरून ने बताया कि आंख की पारदर्शी बाहरी सतह कोर्निया बार-बार दबाव या रगड़ सहन करने के लिए नहीं बनी है। लगातार आंखें मसलने की आदत केराटोकोनस जैसी समस्या से जुड़ी है, जिसमें कोर्निया पतली होकर आगे की तरफ गुंबद जैसा आकार ले लेती है। इससे दृष्टि में धुंधलापन, अस्थिरता और कभी-कभी विशेष उपचार की जरूरत होती है। यह स्थिति मुख्यतः किशोरावस्था या युवावस्था में शुरू होती है।
डॉ. शरून के अनुसार, जब आंखें बार-बार मसलती हैं तो आंख के अंदर दबाव अस्थायी रूप से बढ़ सकता है जिससे आंख की सतह और अधिक जलन महसूस करती है। साथ ही, यदि हाथ साफ नहीं हैं तो इससे एलर्जी, जीवाणु या अन्य प्रदूषक आंखों में प्रवेश कर सकते हैं। जिन लोगों ने हाल ही में आंख का ऑपरेशन कराया हो, उन्हें खास सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि उनकी आंखें अभी ठीक हो रही होती हैं।
आंख मलने की आदत क्यों पड़ती है और बचाव कैसे करें?
लगातार आंखों में खुजली या जलन एलर्जी या सूखी आंखों (ड्राई आई डिजीज) का संकेत हो सकती है। लंबे समय तक डिजिटल डिवाइस का उपयोग करना भी ब्लिंकिंग कम कर आंखों की सतह को सूखा सकता है, जिससे मलने की प्रवृत्ति बढ़ती है। इसलिए केवल आंखें न मलने की सलाह देना समस्या का समाधान नहीं करता, क्योंकि जड़ में बीमारी हो सकती है।
डॉ. शरून ने कहा कि आंख की खुजली या जलन के तुरंत इलाज के लिए ठंडा, साफ कॉम्प्रेस उपयोगी हो सकता है। फिर भी लगातार समस्या होने पर आंखों की जांच आवश्यक है। कुछ मामलों में लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स राहत देते हैं, जबकि एलर्जी के लिए विशेष उपचार जरूरी होता है। यदि चश्मे की पावर में बार-बार बदलाव हो, दृष्टि में धुंधलापन या कोई विकृति नजर आए तो तुरंत ऑप्थेल्मोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए।
इस तरह बार-बार आंख मलना एक छोटी सी आदत लग सकती है, लेकिन यह आंख की परेशानी का संकेत भी हो सकती है। आंखों के स्वास्थ्य को बरकरार रखना आवश्यक है ताकि दृष्टि पर गंभीर प्रभाव न पड़े। समय-समय पर जांच और सावधानी से यह समस्या रोकी जा सकती है।
यह लेख केवल सूचना के लिए है, चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं। किसी भी स्वास्थ्य समस्या पर डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।




