सीईसी विवाद अपडेट: सीजेपी नेताओं ने सरकार पर इमरजेंसी लगाये जाने का आरोप लगाया

दिल्ली में 10 अक्टूबर को होने वाली सीजेपी की विरोध प्रदर्शनी के मद्देनजर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। दिल्ली समेत भारत के कई राज्यों में पुलिस ने संभावित प्रदर्शनकारियों पर नजर रखनी शुरू कर दी है। गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर विरोध के लिए आने वाले लोगों को रोकने के निर्देश दिए हैं।
दिल्ली में सुरक्षा बढ़ाई गई
दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर के प्रदर्शन के लिए संभावित प्रदर्शनकारियों की एक डेटाबेस तैयार की है। इसके तहत विभिन्न राज्यों में उनके बारे में जानकारी मांगी जा रही है, घरों पर पुलिस ने छापेमारी भी की है और कई समर्थकों को हिरासत में लिया गया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में सुरक्षा कड़ी करने के लिए लगभग 20,000 पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात किए गए हैं।
इसके साथ ही, फरवरी-कार्तव्य पथ के आसपास चार किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट सेवा 9 अक्टूबर की रात 10 बजे से 10 अक्टूबर की रात 10 बजे तक बंद रखी जाएगी। इसके अलावा दिल्ली मेट्रो की 57 स्टेशनों को रात 9 बजे से बंद करने का निर्णय लिया गया है ताकि प्रदर्शन के दौरान भीड़ नियंत्रण किया जा सके।
सीजेपी के नेता और विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपक ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए लोगों से अपील की कि अगर उन्हें हिरासत में भी लिया जाता है तो भी प्रदर्शन बंद न किया जाए। उन्होंने कहा, “हम लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं और यह तब तक चलना चाहिए जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते।” अभिजीत ने महात्मा गांधी के अहिंसा मार्ग पर चलने का आग्रह किया।
वहीं, विपक्ष के INDIA ब्लॉक के नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से पिछले दो सालों में हुई सभी विधानसभा चुनावों को रद्द करने की मांग की है और आरोप लगाया है कि चुनावों में वोट चोरी हुई है। राहुल गांधी ने कहा कि यदि विरोध जारी रहता है तो सरकार पूर्ण कार्यकाल पूरा किए बिना गिर सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी शांतिपूर्ण विरोध को नागरिकों का मौलिक अधिकार बताया है और सुरक्षा के मद्देनजर मेट्रो और रेलवे सेवाओं को बंद न करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि यात्री और आम जनता को असुविधा नहीं होनी चाहिए।
रेल मंत्रालय ने सीजेपी विरोध के कारण दिल्ली आने-जाने वाली 245 ट्रेनों को रद्द कर दिया है ताकि वाहनों और भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति भी नहीं दी है क्योंकि पिछले प्रदर्शनों के दौरान नियमों का उल्लंघन हुआ था।
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और इंटरनेट सेवा बंद करने जैसी सुरक्षा उपायों को लेकर सीजेपी ने सरकार पर युवाओं को दबाने और इमरजेंसी जैसी स्थिति लागू करने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह कदम लोकतंत्र को कमजोर करने वाला है।
केंद्र सरकार की ओर से कहीं भी हिंसा या असामाजिक गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, लेकिन विरोध करने वाले लोगों के शांतिपूर्ण आवाज उठाने के अधिकार को सम्मानित किया जाएगा। ऐसे में 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सभी शांतिपूर्ण और संयमित रहें।




