पूर्व DMK मंत्री के खिलाफ ₹100 करोड़ धोखाधड़ी मामले में ED ने जांच शुरू की

पूर्व स्कूल शिक्षा मंत्री अंबिल महेश प्याय्यमोझी, बी.टी. अरासाकुमार और अन्य के खिलाफ लगभग ₹100 करोड़ की धोखाधड़ी के आरोपों की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कार्रवाई शुरू कर दी है। यह मामला केंद्रीय क्राइम ब्रांच (CCB) द्वारा दर्ज प्राथमिकी पर आधारित है, जिसमें आरोपियों द्वारा बड़े पैमाने पर धन जुटाने का आरोप है।
धोखाधड़ी का मामला और आरोप
जानकारी के अनुसार, अरासाकुमार, जिन्हें तमिलनाडु प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन का संस्थापक अध्यक्ष बताया जाता है, पर जून में आठ-नौ अन्य लोगों के साथ आरोप लगे हैं। यह संघ पंजीकृत नहीं है। आरोप है कि उन्होंने कई प्राइवेट स्कूलों से यह दावा कर ₹100 करोड़ से अधिक की रकम वसूली कि वे सरकारी संपर्कों के जरिए स्कूल खोलने और उन्नयन के लिए जरूरी अनुमतियां दिला सकते हैं।
प्राथमिकी में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 12 भी जोड़ी गईं हैं। आरोप है कि अरासाकुमार ने निजी स्कूल प्रबंधन से सरकारी आदेश और अनुमतियां दिलाने का वादा कर उनसे भुगतान लिया। थाने में दर्ज मामले का उल्लेख करते हुए पता चला कि उनके खिलाफ 2013 में पुडुक्कोट्टई जिला अपराध शाखा में भी ऐसा ही एक मामला दर्ज था।
जांच और छापेमारी
CCB ने एकत्र किए सबूतों के आधार पर पूर्व मंत्री अंबिल महेश के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू की। 16 सितंबर को उनके और उनके साथियों के आठ से अधिक स्थानों पर छापे मारे गए। इनमें चेन्नई और तिरुचि में उनके चार ठिकाने शामिल थे। इस दौरान कई दस्तावेज, बैंक के विवरण, चेक और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए।
अंबिल महेश से इस संबंध में पूछताछ भी की गई। इसके बाद ED ने CCB से मामले का विवरण लेकर गहन जांच शुरू की है, जिसका मकसद आरोपित राशि की ट्रैकिंग और अपराध से जुड़े धन के स्रोत को समझना है।
अरासाकुमार को एक विशेष अदालत ने पिछले मंगलवार को ‘डिफ़ॉल्ट बेल’ दे दी क्योंकि जांच एजेंसी अपनी रिपोर्ट निर्धारित 90 दिन के भीतर पेश नहीं कर पाई। इस फैसले से जांच प्रक्रिया पर असर पड़ने की संभावना बनी है।
यह मामला तमिलनाडु में शिक्षा क्षेत्र में भ्रष्टाचार की गंभीर जांच का संकेत देता है। ऐसे आरोप राज्य की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकते हैं। जांच एजेंसियां इस वित्तीय धोखाधड़ी की तह में जाकर दोषियों को कानून के तहत जवाबदेह ठहराएंगी।
अब सवाल यह है कि जांच कब तक समाप्त होगी और क्या इसके दौरान पूर्व मंत्री का नाम और अन्य साक्ष्य सामने आएंगे। ED की इस जांच का परिणाम आगामी दिनों में ही स्पष्ट होगा, जो राज्य की राजनीति और शिक्षा क्षेत्र के लिए अहम माना जा रहा है।




