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ECI ने विपक्षी सांसदों की संसद की अनेक्स में बैठक की मांग को बताया प्रोटोकॉल के खिलाफ

चुनाव आयोग ने विपक्षी सांसदों की संसद की अनेक्स में बैठक की मांग को प्रोटोकॉल के खिलाफ बताया है। राहुल गांधी के नेतृत्व वाली विपक्षी दलों की 240 सांसदों की टीम की यह मांग आयोग ने मंगलवार देर रात जारी बयान में खारिज की। यह बयान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी सांसदों के चुनाव आयोग के खिलाफ मार्च के दौरान रोके जाने के कुछ घंटे बाद आया।

बैठक का प्रोटोकॉल और विरोध प्रदर्शन

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित विपक्षी सांसद मंगलवार को लगभग आठ घंटे तक आकाशवाणी भवन में धरना दे रहे थे। वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर असंतोष व्यक्त कर रहे थे और आयोग में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और पारदर्शिता को लेकर उनकी चिंता थी। विपक्ष की मांग थी कि CEC कुमार को हटाया जाए।

चुनाव आयोग ने बताया कि मंगलवार शाम तक किसी राजनीतिक दल ने औपचारिक बैठक के लिए अनुरोध नहीं किया था। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 4 बजे के बाद राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों का एक समूह आयोग से मिलने और ज्ञापन देने आया, लेकिन उनका अनुरोध असामान्य था।

ECI की प्रतिक्रिया और BJP का बयान

ECI के अनुसार, विपक्षी सांसदों ने बैठक संसद की अनेक्स में करने की मांग की, जो आयोग की नीति के खिलाफ था क्योंकि आयोग की बैठकें केवल उसके कार्यालय परिसर में होती हैं। आयोग ने वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन लेने के लिए भेजने का ऑफर दिया, लेकिन सांसदों ने इसे भी स्वीकार नहीं किया।

भारत सरकार की सत्तारूढ़ पार्टी BJP ने X (पूर्व ट्विटर) पर ECI के बयान को साझा करते हुए राहुल गांधी के आरोपों को झूठा बताया और दावा किया कि चुनाव आयोग ने उनके सभी आरोपों को बेनकाब कर दिया है। BJP ने कहा कि चुनाव आयोग में सभी फैसले तीन आयुक्तों के संयुक्त निर्णय से होते हैं, न कि केवल मुख्य चुनाव आयुक्त के द्वारा।

BJP ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग मिलना चाहता था लेकिन राहुल गांधी निर्धारित प्रक्रिया के तहत बैठक के लिए तैयार नहीं थे। ECI के अनुसार, कोई भी राजनीतिक पार्टी कभी भी आयोग से बैठक के लिए अनुरोध कर सकती है और वह समय सामंजस्य से बैठक निर्धारित करता है।

इस पूरे घटनाक्रम ने चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच जारी तनातनी को और बढ़ा दिया है। विपक्ष आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है, जबकि आयोग और सत्तारूढ़ पार्टी इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुसार निभा रही है।

इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि चुनाव आयोग अपने प्रोटोकॉल का पालन कड़ाई से करता है और राजनीतिक दलों से अपेक्षा करता है कि वे ऐसे नियमों का सम्मान करें। विपक्षी सांसदों की बड़ी संख्या को देखते हुए भी यह नियमों का उल्लंघन कहा गया, जो संसद और लोकतंत्र की प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण समझा जाता है।

आगे की कार्रवाइयों पर नजर बनी हुई है क्योंकि विपक्ष ने आयोग की आलोचना तेज कर दी है और चुनाव प्रणाली में सुधार की मांग कर रहा है। यह मामला आगामी दिनों में राजनीतिक और चुनावी बहसों का केंद्र बना रहेगा।

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