हैदराबाद की रुथ जॉन पॉल बनीं भारत की पहली ट्रांसजेंडर पीजी डॉक्टर

डॉ. रुथ जॉन पॉल ने हैदराबाद के ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल से एमडी इमरजेंसी मेडिसिन पूरी कर भारत में पहली ट्रांसजेंडर महिला के रूप में पोस्टग्रेजुएट डॉक्टर बनने की मिसाल कायम की है। उनका संघर्ष परिवार से अलगाव और आर्थिक कठिनाइयों के बीच अपनी पहचान और सपनों के लिए लड़ने का परिचायक है।
परिवार से अलगाव और आर्थिक संघर्ष
खम्मम जिले की रहने वाली रुथ जॉन पॉल तीन बहनों में सबसे छोटी हैं। आठ साल की उम्र में पिता की मृत्यु के बाद उनकी माता ने उन्हें संभाला। स्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई शुरू की। ग्रेजुएशन के दौरान ही उन्होंने खुद को ट्रांसजेंडर महिला के रूप में स्वीकार किया, जिसके कारण उनका परिवार उनसे अलग हो गया। करीब छह वर्षों तक वे अपने परिवार से कट गईं।
इस दौरान उन्हें बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा। डॉ. रुथ बताती हैं कि कई बार उन्हें भोजन तक नसीब नहीं होता था और रोजी-रोटी के लिए वे संघर्ष करती रहीं। 2021 में उन्होंने भारत की पहली ट्रांसजेंडर क्लिनिक, मित्र क्लिनिक (अब सबरंग क्लिनिक) में पार्ट-टाइम नौकरी शुरू की, जहां उन्होंने दो साल तक काम किया।
कानूनी लड़ाई और मेडिकल शिक्षा
पोस्टग्रेजुएट मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफल होने के बाद भी उन्हें प्रवेश प्रक्रिया में बाधाओं का सामना करना पड़ा क्योंकि ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश मौजूद नहीं थे। इस स्थिति में उन्होंने ट्रांसजेंडर अधिकार कार्यकर्ता व्यजयंती वसन्ता मोगली की मदद से तेलंगाना हाई कोर्ट का सहारा लिया। लगभग दो वर्षों की कानूनी लड़ाई के बाद कोर्ट ने उन्हें प्रवेश का मौका दिया।
2023 में वह हैदराबाद के ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी मेडिसिन में दाखिला लेकर अपने सपने को सच करने लगीं। हालांकि, लोगों का पूर्वाग्रह और असहजता भी बनी रही, लेकिन डॉ. रुथ ने अपने समर्पण से लोगों का विश्वास जीता।
डॉ. रुथ बताती हैं कि क्लिनिकल कार्य के दौरान जब उन्होंने मरीजों से करीबी से संपर्क किया, तो जो लोग शुरुआत में उनसे डरते थे या असहज महसूस करते थे, वे अब उनकी देखभाल और व्यक्तित्व की सराहना करने लगे हैं।
अब डॉ. रुथ का लक्ष्य मेडिकल फील्ड में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए विशेष रूप से आपातकालीन और गंभीर परिस्थितियों में सेवा देना है। उनका मानना है कि सभी को बिना भेदभाव के बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलनी चाहिए।
डॉ. रुथ ने कहा, “मुझे खुशी है कि मैंने पहली बार इस मुकाम को हासिल किया। यह मेरे और मेरे समुदाय के लिए गर्व की बात है। मेरा उद्देश्य सिर्फ सेवा देना है, खासतौर पर उन लोगों को जो सामाजिक रूप से हाशिए पर हैं।”




