पॉलिटिक्स

युवा मतदाता और उनके चुनावी प्रभाव पर प्रभावशील विश्लेषण

युवाजन जनरल चुनाव में और विधानसभा चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जो सात राज्यों में अगले साल होने वाले हैं। युवा मतदाताओं की भागीदारी में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, जिससे राजनीतिक दलों की रणनीतियों पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।

युवा मतदाता भागीदारी के पैटर्न

हाल के लोकनिती-CSDS सर्वेक्षणों के अनुसार, भारत के विभिन्न राज्यों में युवा मतदाताओं की मतदान दर में काफी भिन्नता है। 18-21 वर्ष के युवा मतदाताओं की मतदान दर कुछ राज्यों में अपेक्षाकृत कम रही, जैसे कि बिहार और उत्तर प्रदेश में, जबकि मध्यप्रदेश, पंजाब और गुजरात में इस उम्र के युवाओं ने अधिक सहभागिता दिखाई। यह दर्शाता है कि युवाओं का मतदान व्यवहार स्थानीय राजनीतिक संदर्भ पर निर्भर करता है।

उदाहरण के तौर पर, बिहार में 18-21 वर्ष के युवाओं की मतदान दर केवल 41% रही, जबकि पूरे राज्य में यह 67.3% थी। वहीं, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में युवाओं की मतदान दर 90% से ऊपर रही, जो राजनीतिक सक्रियता का संकेत देती है। इस तरह से युवा वोटरों का व्यवहार एक समान नहीं होता।

युवा वोट कहां और कैसे बदलते हैं

युवा मतदाताओं के राजनीतिक झुकाव अलग-अलग चुनावों में बड़े पैमाने पर बदल सकते हैं। पश्चिम बंगाल में 2021 और 2026 के चुनावों के बीच युवा मतदाताओं का झुकाव AITC+ से BJP की ओर बढ़ा। वहीं, उत्तर प्रदेश में BJP और समाजवादी पार्टी के बीच युवा वोटों का प्रतिस्पर्धात्मक वितरण रहा। इस आयु वर्ग के भीतर भी 18-21 और 22-25 वर्ष के युवाओं के मतभेद दिखाई देते हैं।

यह स्पष्ट है कि ‘‘युवा वोट’’ को एक समान राजनीतिक इकाई के रूप में समझना संभव नहीं है। यह एक ऐसा समूह है जिसकी प्राथमिकताएं चुनाव के राजनीतिक संदर्भ और समय के अनुसार बदलती रहती हैं।

युवा हमेशा विजेता पार्टी को वोट नहीं देते। उदाहरण के लिए, उत्तराखंड में 2022 के विधानसभा चुनावों में युवा मतदाताओं ने कांग्रेस को अधिक समर्थन दिया जबकि BJP चुनाव जीत गई। बिहार में महागठबंधन को युवाओं का समर्थन अधिक था, फिर भी NDA सत्ता में रही।

कुछ मामलों में युवा मतदाताओं ने राजनीतिक बदलावों को मजबूती से प्रभावित किया है। पंजाब के 2022 विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी का युवाओं के बीच खासा समर्थन दिखा जो कांग्रेस को पराजित करने में कारगर रहा। इसी तरह दिल्ली और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी युवाओं ने नए राजनीतिक विकल्पों को चुनने में सक्रिय भूमिका निभाई।

युवा मतदाता सक्रिय, विविध और राजनीतिक परिदृश्य के अनुरूप अपनी पसंद बदलने में सक्षम हैं। उनकी भागीदारी, पार्टी पसंद और मतदान की प्रवृत्तियां राज्यों और चुनावों के हिसाब से भिन्न होती हैं, जो चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकती हैं।

अंत में यह कहा जा सकता है कि भारत में ‘‘युवा वोट’’ एक गतिशील और परिवर्तनीय तत्व है, जिसका चुनावी महत्व इस बात पर निर्भर करता है कि वे कब-कहां और कैसे मतदान करते हैं। आगामी विधान सभा चुनावों में युवा मतदाताओं के व्यवहार पर नजर रखना राजनीतिक विश्लेषकों के लिए आवश्यक होगा।

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