कुमारस्वामी के करीबी पर स्टींग ऑपरेशन जांच में मुख्य संदिग्ध का आरोप

कर्नाटक के तीन मुख्यमंत्रियों से जुड़ी स्टींग ऑपरेशन जांच में केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के aide पर शक जताया गया है। यह मामला नई दिल्ली और बेंगलुरू में जांच के दायरे में है।
जांच में मुख्य संदिग्ध और उनके संबंध
बेंगलुरू सिटी पुलिस कमिश्नर सीमांत कुमार सिंह ने बताया कि दिल्ली में गिरफ्तार रितेश पांडेय की पहचान जनवरी दल (सेक्युलर) नेता कुमारस्वामी के सहयोगी के रूप में हुई है। इसके अलावा विनोद शर्मा और प्रज्वल प्रसाद नाम के दो संदिग्ध अभी फरार हैं। ये सभी संदिग्ध कुमारस्वामी के सोशल मीडिया टीम से जुड़े बताए जाते हैं।
पुलिस का कहना है कि रितेश पांडेय और विनोद शर्मा ने करोल बाग, दिल्ली में एक मोबाइल खरीदा और उसे कुमारस्वामी के निवास स्थान कुशाक रोड पर प्रज्वल प्रसाद को सौंपा गया। कुशाक रोड केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी का आधिकारिक आवास है।
स्टींग ऑपरेशन के आरोप और राजनीतिक संदर्भ
अक्टूबर में कुमारस्वामी ने कांग्रेस नेता सिद्धारमैया पर आरोप लगाया था कि वह चौंकाने वाले स्टींग वीडियो के डर से मुख्यमंत्री पद से हटाए गए थे। इसके जवाब में डी.के. शिवकुमार ने भी कहा था कि उनके खिलाफ स्टींग ऑपरेशन की कोशिश की गई।
इन आरोपों ने कर्नाटक की राजनीति में स्टींग ऑपरेशन, व्हीडियोज और आरोप-प्रत्यारोप की बहस को हवा दी है। सीमांत कुमार सिंह ने यह भी कहा कि संदिग्धों ने मुआवजे के लिए आश्रय की कोशिश की है, लेकिन अब तक दोनों ने नोटिस का जवाब नहीं दिया है।
उन्होंने कहा, “हमारे पास सीसीटीवी, तकनीकी और वित्तीय लेनदेन के सबूत हैं जो प्रज्वल प्रसाद और रितेश पांडेय के बीच जुड़े हैं।” जांच तब तक आगे नहीं बढ़ सकती जब तक शर्मा और प्रसाद से पूछताछ नहीं होती है।
कांग्रेस ने जांच के इस नए पहलू का इस्तेमाल कुमारस्वामी और बीजेपी के सहयोगियों पर निशाना साधने के लिए शुरू कर दिया है।
क्या जांच में आगे क्या होगा?
कर्नाटक गृह मंत्री प्रियांक खर्गे ने कहा है कि प्रारंभिक जांच में कुमारस्वामी के शामिल होने के सबूत मिले हैं। उन्होंने स्पष्ट किया, “अटल सबूत मौजूद हैं, इनकार असंभव है। चित्र अभी बाकी है।”
स्टींग ऑपरेशन और हनीट्रैप मामले कर्नाटक में लंबे समय से राजनीतिक विवाद का हिस्सा रहे हैं। पिछले कई वर्षों में इन मुद्दों पर कई बड़े नेताओं पर आरोप लग चुके हैं। इसलिए वर्तमान जांच राज्य की राजनीतिक बहस में महत्वपूर्ण मोड़ ला सकती है।




