केरल सीएम का एंजियोप्लास्टी पर बयान डॉक्टरों के बीच चर्चा का विषय

केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशेन ने हाल ही में एक कार्यक्रम में अनावश्यक एंजियोप्लास्टी से बचने की सलाह दी, जिससे चिकित्सा जगत में विवाद उत्पन्न हो गया है। कई डॉक्टरों ने उनके सामान्यीकृत बयान पर आपत्ति जताई, जबकि कुछ ने कहा कि मुख्यमंत्री पूरी तरह सही थे क्योंकि अनावश्यक प्रक्रियाएं सामान्य होती जा रही हैं।
चिकित्सा विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
सरकारी मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल, कोझिकोड के कार्डियोलॉजी प्रमुख प्रोफेसर राजेश गोपालन नायर ने फेसबुक पर मुख्यमंत्री के विचारों की सराहना की और इसे एक सच बताने वाला बयान कहा। हालांकि, उनके समर्थन ने चिकित्सकों और जनता दोनों के बीच व्यापक चर्चा छेड़ दी, जिसमें कई लोगों ने अस्पतालों में अपने संघर्षों को साझा किया।
डॉ. राजेश ने स्पष्ट किया कि दिल के संक्रमण या हार्ट अटैक की आशंका होने पर रोगी को डॉक्टर पर भरोसा करना चाहिए क्योंकि ऐसे समय में तत्काल एंजियोप्लास्टी जरूरी हो सकती है।
डॉक्टरों और काउंसिल की ओर से बयान
डॉ. राजेश ने कहा कि जब एंजियोप्लास्टी की सलाह दी जाए तो मरीज को दूसरी राय लेने का अधिकार है और सभी डॉक्टरों या अस्पतालों पर संदेह नहीं करना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि जब चिकित्सकीय आवश्यकताएं स्पष्ट हों, तभी यह प्रक्रिया की जानी चाहिए।
दूसरी ओर, केरल इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी काउंसिल (ICCK) ने कहा कि जनता का अनावश्यक इलाज को लेकर संशय आपातकालीन स्थिति में उपचार में देरी कर सकता है। काउंसिल ने प्रत्येक हस्तक्षेप के लिए व्यापक चिकित्सकीय आधार के समर्थन में अपनी नीति स्पष्ट की।
ICCK के अध्यक्ष राजेश टी ने कहा कि एंजियोप्लास्टी पर सार्वजनिक चर्चा में स्थिर मरीजों में योजना बना कर की जाने वाली सर्जरी और तीव्र हार्ट अटैक में तत्काल की जाने वाली प्रक्रिया के बीच स्पष्ट अंतर होना जरूरी है।
राज्यव्यापी ICCK रजिस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक केरल में 70% से अधिक एंजियोप्लास्टी आकस्मिक और आपातकालीन मामलों में की जाती हैं। काउंसिल ने कहा कि ऐसी चर्चा का स्वागत है जो चिकित्सकीय आधार, पारदर्शिता और रोगी विश्वास को मजबूत करे।
फिर भी, दिल संबंधी प्रक्रियाओं को लेकर व्यापक अविश्वास की स्थिति ऐसे समय में गंभीर समस्या बन सकती है, जब किसी रोगी को सीने में तेज दर्द या हार्ट अटैक के लक्षण महसूस हों। ICCK ने इस बात पर भी चेतावनी दी कि इससे उपचार में विलंब हो सकता है और जानलेवा परिणाम हो सकते हैं।




