केंद्र के नवीनतम फैसले से NEET-SS सीटों में क्या बदलाव होगा

17 सितंबर 2026 को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की सिफारिश को मानते हुए 2025 के NEET-SS परीक्षा के लिए योग्यता प्रतिशत को 50% से घटाकर 30% कर दिया है। इस फैसले के बाद, मेडिकल काउंसलिंग कमिटी ने 25 सितंबर से अतिरिक्त चरण शुरू किया है ताकि 1,857 खाली सीटों को भरा जा सके। इसके साथ ही केंद्र ने तमिलनाडु में 40 खाली in-service सीटें राज्य को वापस देने का भी निर्णय लिया है।
NEET-SS परीक्षा क्या है?
NEET-SS डाक्टर ऑफ मेडिसिन (DM), मास्टर ऑफ सर्जरी (MCh), और डाक्टर ऑफ नेशनल बोर्ड (DrNB) सुपर-स्पेशलिटी कोर्सों में प्रवेश के लिए भारत की एकमात्र प्रवेश परीक्षा है। इस परीक्षा का आयोजन नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) करती है, जो केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वतंत्र संस्था है। भारत में इस परीक्षा के तहत सालाना लगभग 7,000 सीटें उपलब्ध होती हैं जबकि 15,000 से अधिक उम्मीदवार इसमें भाग लेते हैं।
यह परीक्षा 15 विभिन्न समूहों में विभाजित है, जैसे जनरल मेडिसिन, जनरल सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, पीडियाट्रिक्स, ऑब्स्टेट्रिक्स व गायनेकोलॉजी, एनेस्थेसियोलॉजी, रेडियोलॉजी, और अन्य। प्रत्येक समूह का प्रश्नपत्र अलग होता है और कटऑफ भी भिन्न होता है। उदाहरण के लिए जनरल मेडिसिन समूह में कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी सहित कई विषय आते हैं।
खाली सीटों के कारण और कोर्ट की प्रतिक्रिया
सुपर-स्पेशलिटी में सीटें खाली रहने का मुख्य कारण विभिन्न विषयों में मांग का अंतर और उम्मीदवारों की वरीयता है। डॉ. रविंद्रनाथ के अनुसार, प्रतिस्पर्धा वाले विषयों जैसे कार्डियोलॉजी और न्यूरोसर्जरी में सीटें अक्सर भर जाती हैं, जबकि अन्य कम लोकप्रिय विषयों में खाली सीटें रह जाती हैं। निजी कॉलेजों की ऊंची फीस और उम्मीदवारों की पसंद भी इससे जुड़ी प्रमुख समस्याएं हैं।
2023 में 1,003 सीटें खाली रहने पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को इस समस्या का समाधान खोजने के लिए कहा था। तब MCC ने शून्य प्रतिशत वाले उम्मीदवारों को भी सीट लेने की अनुमति दी थी, फिर भी कई सीटें खाली रहीं। 2024 में भी लगभग 600 सीटें खाली थीं, जिसके बाद कोर्ट के निर्देश पर अतिरिक्त काउंसलिंग राउंड हुए।
2026 में तमिलनाडु मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन के दावे पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 2025 के NEET-SS में ज्यादा सीटें खाली रहना योग्यता प्रतिशत घटाने का कारण बना। न्यायाधीशों बी.वी. नागरथना और जॉयमाल्या बगची ने कहा कि सरकरी अस्पतालों में सेवा दे रहे डॉक्टरों के लिए सुपर-स्पेशलिटी में प्रवेश आसान होना चाहिए क्योंकि वे सेवा के दौरान परीक्षा देते हैं।
तमिलनाडु ने अपने सरकारी अस्पतालों में काम कर रहे डॉक्टरों के लिए 50% सीटें आरक्षित की हैं, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में वैध माना। 2025 में राज्य ने 219 सीटें रिजर्व कीं, लेकिन केवल 68 सीटें भरी गईं। शेष 111 उम्मीदवार प्रतीक्षा सूची में थे। केंद्र ने इस विवाद के बाद 40 खाली in-service सीटें राज्य को वापस कर दीं।
हालांकि सीट कटऑफ को कम करना कुछ हद तक समस्या हल कर सकता है, लेकिन डॉ. रविंद्रनाथ के अनुसार यह खाली सीटों की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं कर पाएगा। यूपी, बिहार जैसे राज्यों में सरकारी सीटों की कमी, पदोन्नति के कम अवसर, और कम वेतन जैसी समस्याएं भी इस समस्या को बढ़ावा देती हैं। इसके अतिरिक्त, कई सरकारी अस्पतालों में सुपर-स्पेशलिटी के लिए नई विभागीय व्यवस्था न होना भी इसका कारण है।
कुल मिलाकर, केंद्र का नया निर्णय और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश बेहतर प्रवेश सुविधाएं प्रदान करने की दिशा में कदम हैं, लेकिन अभी भी कई अन्य जटिलताएं इस क्षेत्र में बनी हुई हैं, जिन्हें दूर करने की जरूरत है। यह फैसला NEET-SS परीक्षा में दाखिले की प्रक्रिया को कुछ हद तक सरल बनाता है और विशेषकर सरकारी चिकित्सकों के लिए लाभकारी रहेगा।




