मुंबई में जमीन पर अतिक्रमण की समस्या बढ़ती जा रही है

मुंबई में जमीन पर अतिक्रमण की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे आम नागरिकों की जमीनी संपत्ति सुरक्षित नहीं रह गयी है। शहर के कई इलाकों में बड़ी संख्या में मिल्स भूमि और सार्वजनिक जगहों को निजी बिल्डरों द्वारा अधिग्रहित किया जा रहा है। इस कारण गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों की जमीन छिनी जा रही है।
बिल्डरदारी का बढ़ता प्रभाव
मुंबई में बिल्डरों का प्रभाव इतना बढ़ गया है कि उन्हें आज़ादी से सार्वजनिक और सार्वजनिक हित की जमीन पर कब्जा करने की अनुमति मिलती है। इस नई जमींदारी को बिल्डरदारी कहा जा रहा है, जिसमें बड़े बिल्डर और उद्योगपति अपने फायदे के लिए शहर की जमीनों पर कब्जा करते हैं। आम मुम्बईकर के पास इस प्रभाव से लड़ने के साधन नहीं हैं।
कई बार रेलवे स्टेशन के आसपास की महत्वपूर्ण जमीनों को जनता के लाभ के बजाए बिल्डरों को सौंप दिया जाता है। पार्क, खेल के मैदान और खुली जगहेँ मॉल और ऊंची इमारतों के लिए समर्पित की जा रही हैं। पिछले कुछ समय में समुद्री पुल के सामने एक प्रमुख प्लॉट एक अरबपति के रियलिटी कंपनी द्वारा बंद कर दिया गया है।
सार्वजनिक अस्पतालों की जमीन पर संकट
हाल ही में, सायन अस्पताल के लिए इस्तेमाल हो रही जमीन को भी लक्जरी अपार्टमेंट बनाने के लिए बिल्डरों ने अधिग्रहित कर लिया है। यह जमीन अस्पताल के लिए बेहद जरूरी थी क्योंकि अस्पताल मरीजों और मेडिकल छात्रों के लिए अधिक जगह की मांग कर रहा है। अस्पताल के वार्ड भी अतिभारित हैं लेकिन इसके बावजूद बिल्डरों को यह जमीन मिल रही है।
सायन अस्पताल में सुविधाओं की कमी देखी जाती है जहां मरीज अक्सर भीड़भाड़ से परेशान रहते हैं। फिर भी, अस्पताल के पास की यह जमीन बनाए रखने के बजाए निजी आवासों के लिए विक्रय की जा रही है। इससे अस्पताल के इलाज और विस्तार पर असर पड़ेगा।
क्या बिल्डरदारी और उनके राजनीतिक सहयोगी वास्तव में गरीब मुम्बीकर की भलाई चाहते हैं? यह सवाल गंभीरता से उठता है क्योंकि उनकी प्राथमिकता आम जनता की बजाय खास वर्ग के लाभ में दिखती है।
मुंबई में दशकों से भूमि के सार्वजनिक उपयोग के बदले निजी उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है। पुराने चॉल और मिल्स को हटाकर वहां लग्ज़री मॉल और टावर बनाए जा रहे हैं। इससे गरीबों के रहने के ठिकानों पर असर पड़ रहा है।
न्यायालयों को चाहिए कि वे इस मामले में स्वत: संज्ञान लेकर मुंबई और आसपास के सभी सार्वजनिक भूमि का लेखा-जोखा तैयार करें और आगे किसी भी भूमि के निजी उपयोग पर रोक लगाएं। यह कदम अब तुरंत आवश्यक हो गया है शहर और उसके नागरिकों की सुरक्षा के लिए।




