अडानी एयरपोर्ट्स CEO ने विदेशी एयरलाइंस को दिया नव मुंबई शिफ्ट का अल्टीमेटम

अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स के CEO अरुण बंसल ने 3 नवंबर 2026 को कहा कि जो अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस नव मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (NMIA) में अपनी गतिविधियां नहीं स्थानांतरित करेंगी, वे मुंबई के लिए उड़ानें बंद कर सकती हैं। यह बयान मुंबई में आगामी परिवर्तनों के बीच आया है, जो विमान संचालन के पुनर्विकास से जुड़ा है।
नव मुंबई एयरपोर्ट में शिफ्ट के लिए एयरलाइंस का विरोध
मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (MIAL), जो अडानी कंपनी के अंतर्गत आता है, टर्मिनल 1 के पुनर्विकास के कारण अपनी कुछ उड़ान सेवाओं को टर्मिनल 2 से नव मुंबई एयरपोर्ट में स्थानांतरित करने की तैयारी कर रहा है। इस प्रस्तावित बदलाव का सामना काफी अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने किया है, जो उचित सलाह और यात्री सुविधा पर चिंता जताते हुए इस कदम का विरोध कर रही हैं।
ऐसे में कई एयरलाइंस ने अपनी असहमति जताई है क्योंकि उन्हें लगता है कि मुंबई में अलग-अलग एयरपोर्ट पर ऑपरेशन करना जटिल होगा और इससे यात्रियों को परेशानी हो सकती है। उन्होंने कहा है कि इस बदलाव की प्रक्रिया में उनसे पर्याप्त बातचीत नहीं की गई।
अडानी का स्पष्ट फैसला और आगे की कार्रवाई
अरुण बंसल ने इस विवाद के बीच एयरलाइंस को एक स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा, “जैसे मकान मालिक अपने किरायेदारों को संपत्ति खाली करने को कहता है, वैसे ही हमने एयरलाइंस को अप्रैल से मौजूदा सुविधाएं खाली करने का नोटिस दिया है।” इसका मतलब यह है कि अप्रैल के बाद उन्हें अपनी सेवाएं स्टेशन 2 से नव मुंबई विमानतल पर ले जाना होगा या फिर वे मुंबई के लिए उड़ानें रोक सकते हैं।
बंसल ने बताया कि एयरलाइंस को उसकी जगह बदलने की आजादी है, लेकिन उन्हें अप्रैल तक स्थानांतरण करना अनिवार्य है। यह कदम MIAL के टर्मिनल 1 पुनर्विकास कार्यों को स्मूथ बनाना और ऑपरेशंस को बेहतर तरीके से प्रबंधित करना है।
घटना मालूम होती है कि मुंबई हवाई इलाके में व्यापक विकास हो रहा है, जिसके कारण संचालन को दो अलग-अलग एयरपोर्ट पर विभाजित करना आवश्यक हो गया है। यह नव मुंबई एयरपोर्ट के विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ मुंबई हवाई अड्डे के क्षमता सुधार का भी एक अहम हिस्सा है।
हालांकि एयरलाइंस के लिए यह बदलाव चुनौतिपूर्ण है, किन्तु अडानी एयरपोर्ट्स का दृढ़ रुख इसकी आवश्यकता को दर्शाता है। चारों ओर से इस मुद्दे पर बहस जारी है, क्योंकि जो विदेशी एयरलाइंस अपनी सेवाओं को नव मुंबई नहीं स्थानांतरित करना चाहती, वे अपनी मुंबई एक्सेस वायुदाब सीमित कर सकते हैं।
इस स्थिति से यात्रियों पर भी असर पड़ सकता है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए नए एयरपोर्ट का इस्तेमाल जरूरी होगा। मुंबई से नव मुंबई तक यातायात की व्यवस्था और परिचालन योजना को प्रभावी बनाना भी आवश्यक होगा ताकि यात्रियों को आरामदायक अनुभव मिल सके।
अभी यह देखना बाकी है कि एयरलाइंस इस निर्देश का पालन करती हैं या नहीं, और मुंबई के हवाई परिवहन में यह बड़ा बदलाव किस तरह से लागू होता है। अप्रैल के बाद के परिणाम और विमान सेवाओं पर इसका प्रभाव उद्योग के लिए महत्वपूर्ण होगा।




