स्वास्थ्य

न्यूरोलॉजिस्ट ने बताया नीरसता में दिमाग को आराम देना जरूरी है

मनोवैज्ञानिक और न्यूरोलॉजिस्ट के अनुसार दिमाग को लगातार व्यस्त रखना जरूरी नहीं होता। खुद को खाली छोड़कर बोर होना दिमाग के लिए आराम देने जैसा है। नोएडा के Fortis अस्पताल की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. नेहा पंडिता ने बताया कि दिमाग को समय-समय पर आराम देना उसके ध्यान केंद्रित रहने के लिए जरूरी है।

डॉ. नेहा बताती हैं कि लगातार संदेशों, ईमेल और सोशल मीडिया के बीच स्विचिंग दिमाग पर भारी पड़ती है। इस प्रकार की अनवरत व्यस्तता दिमाग को मानो सोचने और अनुभवों को समझने का समय नहीं देती। इसलिए हर खाली पल में फोन या स्क्रीन पर नहीं जाना चाहिए।

नीरसता के दौरान दिमाग क्या करता है

जब आप किसी काम में व्यस्त नहीं होते और अकेले होते हैं, तब भी दिमाग पूरी तरह से बंद नहीं होता। यह एक विशेष नेटवर्क जिसे डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क कहा जाता है, सक्रिय करता है। यह नेटवर्क स्मृति, आत्म-चिंतन और भविष्य के बारे में सोचने से जुड़ा होता है। ऐसे समय दिमाग अनुभवों को प्रोसेस करता है और नए विचार बनाता है।

डॉ. नेहा ने यह स्पष्ट किया कि हमारे दिमाग को संतुलित करने के लिए ‘नीरसता’ और ‘मानसिक थकावट’ के बीच अंतर समझना जरूरी है। नीरसता तब होती है जब कोई गतिविधि हमें संतुष्ट नहीं करती, जबकि मानसिक थकावट लंबे समय तक ध्यान केंद्रित करने या काम करने से होती है।

दिमाग को आराम देने के आसान तरीके

डॉ. नेहा के अनुसार आप स्मार्टफोन पूरी तरह से छोड़ने की जरूरत नहीं है, बल्कि कुछ आधारित आदतें अपनाकर आपके दिमाग को आराम दिया जा सकता है। जैसे, जब आप कतार में खड़े हों या अकेले हों तो तुरंत फोन न देखें। काम के दौरान ब्रेक लें और कंप्यूटर से सीधे फोन पर न जाएं।

कभी-कभी बिना हेडफोन के टहलें और अपने विचारों को स्वतंत्र रूप से घूमने दें। भोजन करते समय मोबाइल का उपयोग कम करें और बातचीत के दौरान पूरी तरह से ध्यान दें। रात को सोने से पहले लगातार स्क्रॉलिंग करने से बचें और दिमाग को शांत होने का समय दें।

डॉ. नेहा ने सलाह दी कि जब भी आप बोर महसूस करें, तो तुरंत फोन पर जाने की जगह कुछ पल के लिए आराम करें। इससे दिमाग को अनुभवों को व्यवस्थित करने और बेहतर सोच विकसित करने में मदद मिलती है।

इस तरीके से हम अपनी दिमागी सेहत बेहतर बना सकते हैं और मानसिक थकावट से बच सकते हैं। बोर होना समय की बर्बादी नहीं बल्कि दिमाग के लिए आवश्यक ब्रेक है। यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक सकारात्मक कदम है जो हमें ज्यादा ध्यान केंद्रित और ताजगी से भरपूर रखने में मदद करता है।

मुख्य तथ्य:

  • डॉ. नेहा पंडिता ने बताया कि दिमाग को आराम देना जरूरी है।
  • निरंतर स्क्रीन उपयोग से दिमाग को विश्राम नहीं मिल पाता।
  • डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क दिमाग में आत्मचिंतन और स्मृति से जुड़ा है।
  • बोरियत और मानसिक थकावट में अंतर समझना आवश्यक है।

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