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श्रीरंगपट्टण दशहरा महोत्सव भव्य आयोजन के साथ शुरू

श्रीरंगपट्टण दशहरा महोत्सव-2026 का भव्य शुभारंभ गुरुवार को हुआ, जिसमें प्रसिद्ध कन्नड़ फिल्म अभिनेता और निर्देशक वी. रविचंद्रन ने माँ चामुंडेश्वरी को पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। यह आयोजन राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर उत्साहजनक साबित हुआ।

उद्घाटन समारोह और प्रमुख उपस्थितियां

उद्घाटन समारोह की शुरुआत श्रीरंगपट्टण तालुक के किरणगुड़ गाँव स्थित बंनिमंतप के पास बाबुरायनकोप्पल चौराहा में हुई। यहाँ पर विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के साथ उत्सव का आरंभ किया गया। माँ चामुंडेश्वरी की मूर्ति, जो 250 किलोग्राम वजन वाले लकड़ी के होदह में विराजमान थी, को कई गणमान्य व्यक्तियों ने पुष्प अर्पित किए।

इस अवसर पर कृषि मंत्री पी.एम. नरेंद्रस्वामी, मंड्या जिले के प्रभारी मंत्री एन. चेलुवरायस्वामी, नगर प्रशासन मंत्री एच.सी. बालकृष्ण, स्थानीय विधायक ए.बी. रमेश बंदिसिद्धेगौड़ा, विधायक दर्शन पुत्तन्नैयाह और विधान परिषद सदस्य दिनेश गोलिगौड़ा मौजूद थे। इसके अलावा उपायुक्त कुमार तथा पुलिस अधीक्षक शोभारानी वी.जे. जैसे अधिकारी भी उपस्थित रहे।

धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक समागम

श्रीरंगपट्टण दशहरा के दौरान पारंपरिक शमी वृक्ष पूजा सहित अन्य धार्मिक क्रियाकलाप संपन्न हुए। इन अनुष्ठानों ने उत्सव की महत्ता और धार्मिकता को बढ़ाया। इस पर्व को मनाने के लिए स्थानीय लोग बड़ी संख्या में एकत्र हुए, जिन्होंने खुशियों और आस्था के साथ हिस्सा लिया।

दशहरा जुलूस का मुख्य आकर्षण हाथी धनंजय था, जिसने लकड़ी के होदह को स्वयं पर सवार किया। उसके साथ हाथी लक्ष्मी और रूपा भी जुलूस में शामिल थे। तीनों हाथी श्रीरंगपट्टण की प्रमुख सड़कों से गुजरे, जहां उन्होंने भीड़ का ध्यान आकर्षित किया।

जुलूस में कुल 62 सांस्कृतिक समूह और 10 भव्य झांकियां शामिल थीं, जिन्होंने कर्नाटक की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, कलात्मक परंपराओं और विविधताओं को दर्शाया। रंगीन प्रस्तुतियां और प्रदर्शन समारोह की जीवंतता का हिस्सा बनी।

यह दशहरा महोत्सव न केवल धार्मिक उत्सव है बल्कि कर्नाटक की सांस्कृतिक धरोहर को भी गर्व के साथ प्रस्तुत करता है। आने वाले दिनों में पुनः कई सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन होंगे, जो इस उत्सव को और भी उत्साहजनक बनाएंगे।

श्रीरंगपट्टण दशहरा समारोह राज्य और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त पहल से सुचारू रूप से आयोजित किया जा रहा है। इससे स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है और क्षेत्रीय परंपराएं जीवंत रहती हैं। विद्यार्थियों और पर्यटकों के लिए यह एक शैक्षिक और मनोरंजक अवसर बन गया है।

इस प्रकार, श्रीरंगपट्टण दशहरा-2026 ने भव्य प्रारंभ के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को पुनः स्थापित किया है। सभी उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों और श्रद्धालुओं ने इस आयोजन में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की, जिससे यह पर्व और भी प्रतिष्ठित बन पाया। भविष्य में इसके और विस्तार की भी उम्मीद है।

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