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जल सुरक्षात्मक भविष्य की योजना पर ‘ज़ेनरेनमैन’ एस. विश्वनाथ

जल सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सही योजना बनाना आज की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है। पिछले लगभग तीन दशकों से इस क्षेत्र में काम कर रहे एस. विश्वनाथ ने बताया कि बारिश के पानी को बचाने और पानी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए किस तरह के प्रयास हो सकते हैं।

जल प्रबंधन में अनुभव और शुरुआत

एस. विश्वनाथ ने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में अर्बन और रीजनल प्लानिंग का डिप्लोमा प्राप्त किया। उन्होंने जल विज्ञान, भूविज्ञान और मृदा विज्ञान की समझ विकसित की, जिससे उन्हें जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की जानकारी मिली। उनकी शुरुआत हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (HUDCO) में हुई, जहां उन्होंने छोटे-छोटे शहरों और गांवों में पानी की समस्याओं का अवलोकन किया।

उनका अनुभव बताता है कि बेहतर आवासीय परियोजनाओं के लिए पानी और स्वच्छता के भरोसेमंद इंतजाम नितांत आवश्यक हैं। इसके बिना लोगों के आरामदायक जीवन की कल्पना मुश्किल है। आरंभिक दौर में यही समझ उनकी सोच की नींव बनी।

जल सुरक्षा के लिए व्यावहारिक समाधान

आगे चलकर उन्होंने ‘अर्घ्यम’ नामक एक संगठन के साथ जुड़कर अधिक व्यावहारिक उपायों पर काम किया। उनका कहना है कि स्थानीय लोगों की समस्याएं समझना और उनकी राय लेना सफलता की कुंजी है। तकनीकी ज्ञान अच्छी योजना का केवल एक हिस्सा है, अंततः जमीन पर काम करने वाले लोगों की जरूरतों के अनुसार समाधान बनाना जरूरी होता है।

उनका रोजमर्रा का काम योजना बनाना, गांवों का दौरा करना, सरकारी विभागों से संवाद करना और जल संरक्षण के लिए तकनीकी सलाह देना शामिल है। वे वर्षा जल संचयन, झीलों और गाँव के तालाबों की मरम्मत, भूजल पुनर्भरण जैसे उपायों के माध्यम से जल सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।

एस. विश्वनाथ का मानना है कि सफल जल प्रबंधन के लिए सहानुभूति, सहयोग और व्यवहारिकता आवश्यक हैं। उन्होंने कई बार देखा है कि जब तालाबों की सफाई और बारिश के पानी के संचयन पर काम किया जाता है तो किसानों और ग्रामीणों की ज़िंदगी में सुधार आता है। इससे खेतों में फसल संजोना और जल उपलब्धता बेहतर होती है।

जैसे पिचगुंटलहल्ली गांव में तालाब की सफाई के बाद तीन फसलें उपजाने का अवसर मिला। यह अनुभव उनके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है और उन्होंने इसे शब्दों में व्यक्त किया कि इससे उन्हें अपना काम सच्चा और सार्थक लगता है।

जल सुरक्षा की चुनौतियां बड़ी और जटिल हैं, क्योंकि ये पुराने सामाजिक और भौगोलिक इतिहास से जुड़ी हैं। संसाधनों की कमी, सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता, धैर्य और सतत सीखना इस क्षेत्र के प्रमुख तत्व हैं। विश्वनाथ ने कई फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं से प्रेरणा लेकर अपने प्रयास जारी रखे हैं।

अंत में, उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि जल प्रबंधन एक चुनौतीपूर्ण लेकिन रोमांचक क्षेत्र है। जल सुरक्षा में भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ सहानुभूति और सुनने की क्षमता भी जरूरी है। सही मेंटरशिप और क्षेत्रीय अनुभव से यह करियर जीवनभर फलता-फूलता रहेगा।

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