थ्राइव कैपिटल ने ओपनएआई में लगभग 1 बिलियन डॉलर का निवेश किया है, जिसकी वैल्यूएशन 285 बिलियन डॉलर है, स्रोत बताते हैं।

### स्थानीय किसानों का संघर्ष: फसल की बर्बादी और राज्य की अनदेखी
बीते सप्ताह, उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव में किसानों की एक सभा का आयोजन किया गया। इस सभा का उद्देश्य हाल की बेमौसम बारिश के कारण हुई फसल बर्बादी पर चर्चा करना था। किसानों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि उनकी मेहनत पर पानी फिर गया है, और अब उन्हें चिंता है कि वे अपने परिवार का भरण-पोषण कैसे करेंगे।
गांव के किसान रामू ने कहा, “हमने साल भर मेहनत की, लेकिन अब हमारी फसल बर्बाद हो गई है। हमें सरकार से मदद की उम्मीद थी, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।” रामू की बातों में निराशा साफ झलक रही थी। उन्होंने बताया कि पिछले महीने हुई बारिश ने उनके धान के खेतों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया।
इस सभा में उपस्थित अन्य किसानों ने भी अपनी समस्याओं को साझा किया। कुछ किसानों ने बताया कि उन्हें फसल बीमा का लाभ नहीं मिल रहा है, जबकि अन्य ने खाद और बीज के दामों में बढ़ोतरी का उल्लेख किया। यह समस्या केवल एक गांव की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की है।
किसान नेता श्यामलाल ने कहा, “हमें अब इस समस्या पर एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। सरकार को हमारी बातें सुननी चाहिए और हमें उचित मुआवजा देना चाहिए।” उन्होंने ध्यान दिलाया कि किसानों की उपेक्षा करना किसी भी सरकार के लिए सही नहीं है।
स्थानीय प्रशासन की ओर से भी इस स्थिति पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। किसानों के इस संकट को देखते हुए, कई संगठनों ने इस मुद्दे पर ध्यान देने का आश्वासन दिया है।
इस बीच, मौसम विभाग ने भविष्यवाणी की है कि अगले कुछ दिनों में और बारिश हो सकती है, जिससे किसानों की चिंताएं और बढ़ गई हैं। उनकी आशंका है कि अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो उन्हें और भी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
यह मामला सिर्फ फसल बर्बादी का नहीं है, बल्कि यह किसानों की आर्थिक स्थिति और उनके भविष्य का भी सवाल है। जब तक सरकार इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाएगी, तब तक किसानों की हालत में सुधार होना मुश्किल है।
इस संकट के समय में, किसानों की एकजुटता और उनकी आवाज़ उठाना आवश्यक है, ताकि उनकी समस्याओं का हल निकाला जा सके। उम्मीद है कि जल्द ही प्रशासन इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाएगा।



