स्वास्थ्य

टेली-मनास हेल्पलाइन में बढ़ा मानव सलाहकारों का रुझान, मानसिक स्वास्थ्य पर एआई निराश

नई दिल्ली, भारत – टेली-मनास हेल्पलाइन पर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए कॉल करने वालों की संख्या में हाल ही में बदलाव देखा गया है। जहां पहले लोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित सहायता प्रणाली का उपयोग करते थे, अब वे अधिकतर अपनी समस्याओं के लिए मानव सलाहकारों से संवाद करना पसंद कर रहे हैं।

टेली-मनास हेल्पलाइन, जो मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल के लिए एक अहम प्लेटफॉर्म है, पिछले वर्षों में एआई तकनीक के माध्यम से त्वरित और प्रभावी सहायता प्रदान करने का प्रयास कर रही थी। हालांकि, हालिया सर्वेक्षण और फीडबैक ने यह दर्शाया है कि मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक मुद्दों के समाधान में मशीन आधारित सिस्टम में सीमाएं हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य एक जटिल और संवेदनशील क्षेत्र है, जहां मानवीय सहानुभूति और समझ की अत्यंत आवश्यकता होती है। एआई द्वारा दी जाने वाली प्रतिक्रियाएं अक्सर तटस्थ या तकनीकी दृष्टिकोण से होती हैं, जो व्यक्ति की भावनात्मक स्थिति को पूरी तरह समझने में असमर्थ रहती है। परिणामस्वरूप, मरीजों को वास्तविक मानव संपर्क और व्यक्तिगत समझ की तलाश होती है।

टेली-मनास के निदेशक डॉ. रजनी शर्मा ने बताया, “हमने देखा है कि हेल्पलाइन पर कॉल करने वाले अब अधिकतर अनुभवी और प्रशिक्षित काउंसलर से बात करना पसंद कर रहे हैं। यह परिवर्तन स्वास्थ्य सेवाओं में एक नई दिशा संकेत करता है, जहां तकनीक और मानव संसाधन का संतुलित प्रयोग जरूरी है।”

इसके अतिरिक्त, हेल्पलाइन पर मानवीय इंटरेक्शन के बढ़ने का एक कारण यह भी है कि कई मरीज एआई आधारित जवाबों को यथार्थवादी या सहानुभूतिपूर्ण नहीं पाते। खासकर उन मामलों में जहां व्यक्ति को गहरी भावनात्मक सहारा चाहिए होता है, ऐसे समय में एक वास्तविक इंसान से बात करना अधिक प्रभावी साबित होता है।

विश्लेषकों ने सुझाव दिया है कि सरकारी और निजी मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को एआई तकनीकों के साथ-साथ मानवीय संसाधनों में निवेश बढ़ाना चाहिए ताकि उपयोगकर्ताओं को बेहतर, समग्र और सहायक देखभाल मिल सके।

इस बदलाव ने टेली-मनास हेल्पलाइन के कामकाज में भी सुधार किये हैं, जिससे उनकी सेवाएं और अधिक व्यक्तिगत व भरोसेमंद बन सकीं हैं। आने वाले वर्षों में इस संतुलन को बनाए रखना मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की सफलता के लिए महत्त्वपूर्ण होगा।

संक्षेप में, यह स्पष्ट है कि भले ही तकनीक ने स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं, लेकिन मानवता और समझ की भूमिका अब भी अपरिहार्य है, खासकर मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में।

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