स्वास्थ्य

दक्षिण एशियाई महिलाओं में अन्य जातीयताओं की तुलना में पहले मेनोपॉज का अधिक खतरा: अध्ययन

नई दिल्ली, दिल्ली – हाल ही में एक महत्वपूर्ण अध्ययन में यह पाया गया है कि प्रीमैच्योर मेनोपॉज यानि समय से पहले मेनोपॉज का अनुभव करने वाली महिलाएं हृदय रोग के उच्च जोखिम वाली महिलाओं की श्रेणी में आ सकती हैं। शोधकर्ताओं ने बताया कि पूर्व और समय से पहले मेनोपॉज महिलाओं में दिल की बीमारियों के लिए स्वतंत्र और सुसंगत संकेतक हो सकते हैं।

अधयन में विशेष तौर पर दक्षिण एशियाई महिलाओं को लेकर चिंता जताई गई है क्योंकि इस क्षेत्र की महिलाओं में अन्य जातीय समूहों की तुलना में मेनोपॉज जल्दी शुरू होने की संभावना अधिक पाई गई है। इससे संकेत मिलता है कि इन्हें हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है, जो उनके स्वास्थ्य के लिए एक चुनौती पेश करता है।

शोधकर्ता बताते हैं कि मेनोपॉज में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होना हृदय रोग के जोखिम को बढ़ाता है, क्योंकि एस्ट्रोजन हृदय और रक्त वाहिकाओं की सुरक्षा करता है। समय से पहले हार्मोनल परिवर्तन से यह सुरक्षा कम हो जाती है, जिससे हृदय रोग की संभावना बढ़ जाती है।

अध्ययन में यह भी कहा गया कि मेनोपॉज के समय पर नियंत्रण के लिए महिलाओं को जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाने की सलाह दी जाती है, जैसे कि नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, तनाव प्रबंधन और धूम्रपान से बचाव। इन उपायों से हृदय रोग के जोखिम को कम किया जा सकता है।

डॉ. साक्षी अग्रवाल, एक प्रमुख हृदय विशेषज्ञ ने कहा, “हमारे लिए यह जरूरी है कि हम महिलाओं के मेनोपॉज के अनुभव पर अधिक ध्यान दें और समय से पहले मेनोपॉज वाले महिलाओं की विशेष देखभाल करें। इससे हृदय रोगों से बचाव में मदद मिलेगी।”

दक्षिण एशियाई महिलाओं में हृदय रोग के बढ़ते खतरे के मद्देनजर चिकित्सकों और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों को एक व्यापक रणनीति बनानी होगी जिसमें मेनोपॉज और हृदय स्वास्थ्य के बीच संबंध को समझते हुए जागरूकता बढ़ाना शामिल हो।

अमेरिकी हार्ट एसोसिएशन द्वारा भी इस शोध का स्वागत किया गया है, और वह महिलाओं के हृदय स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करने के लिए नए कार्यक्रमों पर काम कर रहा है।

इस अध्ययन के परिणामों का लक्ष्य महिलाओं के स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभावों को पहचानना और उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है जिससे वे हृदय रोग से बच सकें। इस क्षेत्र में और शोध की आवश्यकता भी बताई गई है ताकि विभिन्न जातीयताओं के बीच मेनोपॉज के प्रभावों को और गहराई से समझा जा सके।

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