समंदर, संगीत और मोहब्बत… जब ‘चरस’ ने बड़े पर्दे पर रचा था धर्मेंद्र-हेमा की रोमांटिक दुनिया

1976 में रिलीज हुई Charas को आज भी हिंदी सिनेमा की उन फिल्मों में गिना जाता है, जिसने मनोरंजन के साथ सामाजिक संदेश को भी बड़े प्रभावी ढंग से पेश किया। निर्देशक Ramanand Sagar की इस फिल्म ने ड्रग्स तस्करी जैसे गंभीर विषय को रोमांस, संगीत और विदेशी लोकेशनों के साथ इस अंदाज में पिरोया कि यह अपने दौर की चर्चित फिल्मों में शामिल हो गई।
फिल्म के 50 साल पूरे होने पर एक बार फिर Dharmendra और Hema Malini की यादगार जोड़ी चर्चा में है। ‘शोले’ की सफलता के बाद दर्शकों के बीच वीरू और बसंती की जो केमिस्ट्री लोकप्रिय हुई थी, उसे रामानंद सागर ने ‘चरस’ में और भी खूबसूरती से पेश किया। पर्दे पर दोनों की नजदीकियां और रोमांटिक अंदाज उस समय खूब पसंद किए गए थे।
फिल्म की कहानी ड्रग्स तस्करी और अंतरराष्ट्रीय अपराध के इर्द-गिर्द घूमती है। उस दौर में जब भारत में नशे के कारोबार पर बहुत कम फिल्में बनती थीं, तब ‘चरस’ ने इस मुद्दे को मुख्यधारा सिनेमा में जगह दी। फिल्म का शुरुआती संदेश ही यह साफ कर देता है कि यह मानवता और समाज को बचाने की लड़ाई की कहानी है।
हालांकि फिल्म का सामाजिक संदेश मजबूत था, लेकिन इसकी सबसे बड़ी ताकत बनी धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की प्रेम कहानी। खूबसूरत समुद्री किनारे, विदेशी लोकेशन और रोमांटिक गानों ने फिल्म को खास बना दिया। माल्टा और रोम जैसी लोकेशनों पर हुई शूटिंग उस समय हिंदी फिल्मों में बहुत बड़ा आकर्षण मानी जाती थी।
फिल्म में Amjad Khan ने खलनायक की भूमिका निभाई थी। ‘शोले’ के गब्बर सिंह के बाद दर्शकों ने उन्हें एक बार फिर दमदार निगेटिव किरदार में देखा। उनकी मौजूदगी ने फिल्म के रोमांच को और बढ़ा दिया।
‘चरस’ के गीत भी आज तक लोगों की जुबान पर हैं। Anand Bakshi के लिखे गीतों को Lata Mangeshkar, Kishore Kumar, Mohammed Rafi और Asha Bhosle जैसी महान आवाजों ने अमर बना दिया। ‘आजा तेरी याद आई’ और ‘मैं एक शरीफ लड़की’ जैसे गाने आज भी पुराने संगीत प्रेमियों की पसंद बने हुए हैं।
पचास साल बाद भी ‘चरस’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि उस दौर की रोमांटिक और संगीतभरी सिनेमाई यादों का हिस्सा बनी हुई है।



