राहul Gandhi का तंज: अब क्यों भाजपा नेता सिलेंडर लेकर सड़कों पर नहीं उतरे हैं LPG कीमतों के बढ़ोतरी के विरोध में

नई दिल्ली, भारत – कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर संसद में पश्चिम एशिया के संघर्ष के मद्देनजर 41 देशों में ईंधन स्रोतों को विविधतापूर्ण बनाने के अपने ‘‘भव्य दावों’’ को पूरा न करने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने बड़े दावों के बावजूद क्या हुआ और जनता को क्या मिला।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि पीएम मोदी ने संसद में बड़े जोश और गर्व के साथ बताया था कि देश ईंधन संकट से निपटने के लिए विदेशों से आयात के विकल्प तलाश रहा है। उन्होंने कहा था कि इस मुद्दे को लेकर 41 देशों से समझौते और सहयोग की दिशा में कदम उठाए गए हैं। लेकिन आज आम जनता को यही समझ नहीं आ रहा कि इन महान दावों का हक़ीक़त में क्या असर हुआ है, खासकर जब रसोई गैस के सिलेंडर की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है।
कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि जब कीमतें आसमान छू रही हैं, तब भाजपा नेता विरोध प्रदर्शन के लिए सड़कों पर क्यों नहीं उतरे? उनका कहना था कि विपक्षी दल की भूमिका आलोचना की होती है, लेकिन सरकार का फर्ज़ है कि वह जनता को राहत पहुंचाए। हालांकि, अब जो स्थिति बनी है, वह देशवासियों के लिए परेशानी का सबब बनी है।
खड़गे ने आगे कहा कि तेल और गैस की कीमतों में वृद्धि से न केवल गरीब परिवार प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि मध्यम वर्ग भी इससे बुरी तरह जूझ रहा है। उन्होंने सरकार से तत्काल प्रभाव से रसोई गैस की सब्सिडी बढ़ाने और घरेलू उपयोग के सिलेंडरों की कीमतों में स्थिरता लाने की मांग की।
विशेषज्ञों का कहना है कि देश में अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर घरेलू गैस मूल्य निर्धारण पर सीधे पड़ता है। इसके अलावा, सरकार को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर भी ध्यान देना होगा ताकि ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
परिवहन और लॉजिस्टिक्स के लिए भी तेल की बढ़ती कीमतें चिंता का विषय बनी हुई हैं, जिससे महंगाई पर व्यापक प्रभाव पड़ रहा है। विपक्ष द्वारा उठाए गए ऐसे मुद्दे आगामी महीनों में राजनीतिक बहस का हिस्सा बने रहेंगे।
सारांश करते हुए, मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री की संसद में की गई वादाखिलाफी का खामियाजा सीधे आम आदमी भुगत रहा है, और इसका समाधान जल्द से जल्द निकालना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।’’



