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लखनऊ अग्निकांड : लालच और लापरवाही में जिंदगी की जंग हार गए 15 लोग, आखिर असली गुनहगार कौन?

रेसिडेंशियल बिल्डिंग को बनाया गया कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, फायर सेफ्टी के अभाव और प्रशासनिक लापरवाही पर उठे बड़े सवाल

लखनऊ/सब तक एक्सप्रेस।

राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र स्थित एक एनिमेशन स्टूडियो वाली इमारत में लगी भीषण आग ने 15 लोगों की जिंदगी छीन ली। इस दर्दनाक हादसे में ज्यादातर छात्र और युवा कर्मचारी अपनी जान गंवा बैठे। हादसे के बाद सामने आए तथ्यों ने बिल्डिंग मालिकों की लापरवाही और व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया है।
जानकारी के अनुसार जिस इमारत में आग लगी, वह मूल रूप से आवासीय उपयोग के लिए बनाई गई थी, लेकिन वर्ष 2014 में इसे व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा। हाउस टैक्स के रिकॉर्ड में आज भी यह भवन रेसिडेंशियल श्रेणी में दर्ज है। बताया जा रहा है कि भवन मालिकों ने कभी अग्निशमन विभाग से एनओसी नहीं ली और नियमों में मौजूद खामी का लाभ उठाकर फायर सेफ्टी मानकों की अनदेखी की गई। हादसे के समय इमारत में बाहर निकलने का केवल एक रास्ता था, जो आग की चपेट में आ गया।
आग लगने के बाद कई छात्र और कर्मचारी बाथरूम में छिपकर अपनी जान बचाने की कोशिश करते रहे। कुछ लोगों ने खिड़कियों और पाइप के सहारे बाहर निकलने का प्रयास किया। एक युवक ने आग से बचने के लिए ऊपरी मंजिल से छलांग लगा दी और गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना की सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुंच गए। कई माता-पिता अपने बच्चों को बचाने की गुहार लगाते रहे, जबकि स्थानीय लोगों ने भी शीशे तोड़कर और अन्य तरीकों से फंसे लोगों को बचाने का प्रयास किया।
अधिकारियों के अनुसार इमारत में अंदर जाने और बाहर निकलने का केवल एक ही रास्ता था। स्थिति बिगड़ने पर एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और फायर सर्विस की टीमों ने बगल की दीवार तोड़कर अंदर पहुंचने का प्रयास किया। रेस्क्यू ऑपरेशन में 19 दमकल गाड़ियों को लगाया गया। बिल्डिंग के बेसमेंट और निचली मंजिलों पर पेट शॉप और वेटरनरी क्लिनिक संचालित हो रहा था, जबकि ऊपरी मंजिलों पर एनिमेशन स्टूडियो और कोचिंग सेंटर चल रहा था। गर्मी की छुट्टियों के कारण वहां बड़ी संख्या में छात्र मौजूद थे।
शाम होते-होते बचाव अभियान रिकवरी ऑपरेशन में बदल गया। जैसे-जैसे शव बाहर निकाले जाने लगे, परिजनों का दर्द और बढ़ता गया। अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस के बाहर अपनों की तलाश में लोगों की भीड़ लगी रही।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपना कार्यक्रम बीच में छोड़कर लखनऊ पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने घायलों के समुचित इलाज के निर्देश दिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया। मुख्यमंत्री के निर्देश पर चार अधिकारियों को निलंबित किया गया है। वहीं छह नामजद लोगों समेत अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि वर्षों से चली आ रही अनियमितताओं पर प्रशासन की नजर क्यों नहीं गई। क्या केवल निलंबन और गिरफ्तारी से उन परिवारों का दर्द कम हो पाएगा, जिन्होंने अपने बच्चों को हमेशा के लिए खो दिया? लखनऊ अग्निकांड ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि लालच और लापरवाही की कीमत आम लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है।

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