महाराष्ट्र मंत्री ने स्वीकारा, उन्हें टीईटी परीक्षा के आगरा में प्रिंट होने की जानकारी नहीं थी: बीजेपी विधायक

मुंबई, महाराष्ट्र | 27 अप्रैल 2024
महाराष्ट्र के राज्य विद्यालय शिक्षा मंत्री द्वारा टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) के प्रश्नपत्र आगरा में छपने को लेकर अपनी जानकारी में कमी स्वीकार करने के बाद, राज्य के शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं। इस मामले को लेकर पूर्व मंत्री सुधीर मुंगंटीवार ने इस घटना को शिक्षा विभाग की बड़ी चूक करार दिया है और सभी राज्य स्तरीय परीक्षाओं की व्यापक समीक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया है।
मंत्री के इस बयान ने शिक्षा विभाग की पारदर्शिता और जिम्मेदारी पर कई बहसें छेड़ दी हैं। टीईटी परीक्षा देशभर में शिक्षक चयन की एक महत्वपूर्ण परीक्षा है, जिसकी तैयारी और संचालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही शिक्षा प्रणाली पर बड़ा असर डाल सकती है। मंत्री के अनुसार, उन्हें यह पहले ज्ञात नहीं था कि टीईटी के प्रश्नपत्र आगरा में प्रिंट किए गए थे, जो विभाग की संगठनात्मक कमजोरी का संकेत है।
पूर्व मंत्री सुधीर मुंगंटीवार ने कहा, “यह स्थिति बताती है कि राज्य के शिक्षा विभाग में महत्वपूर्ण प्रक्रिया और नियंत्रण के मामलों में गंभीर कमियां हैं। ऐसे में हम सभी परीक्षाओं की पारदर्शिता और मानक सुनिश्चित करने के लिए एक समग्र समीक्षा की ज़रूरत है।” उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा संबंधी प्रक्रियाओं में किसी भी प्रकार की असावधानी तत्काल सुधारी जानी चाहिए ताकि विद्यार्थियों और अभ्यर्थियों का विश्वास बना रहे।
इस बीच, विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर सरकार की तीखी आलोचना की है और सवाल उठाए हैं कि शिक्षा विभाग में इतनी संवेदनशील जानकारी मंत्री को भी कैसे नहीं थी। कई नेताओं ने इस घटना को शिक्षा व्यवस्था में मौजूद अव्यवस्था का उदाहरण बताया और बेहतर निगरानी तथा जवाबदेही की मांग की है।
मंत्री के इस खुलासे के बाद टीईटी परीक्षा की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठने लगे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि परीक्षा के प्रश्नपत्रों के प्रिंटिंग तथा वितरण की प्रक्रिया बहुत अधिक गोपनीय और सही ढंग से होनी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना न रहे। साथ ही उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर शिक्षा विभाग को तेजी से जांच कर सुधारात्मक कदम उठाना चाहिए।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि शिक्षा विभाग शीघ्र ही इस मामले की आंतरिक जांच करेगा और सभी परीक्षाओं की प्रक्रिया का पुनर्मूल्यांकन होगा, ताकि भविष्य में ऐसी चूक न हो। इसके अलावा पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिजिटल माध्यमों का उपयोग भी बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।
टीईटी परीक्षा का आयोजन हर वर्ष कई हजार अभ्यर्थियों के लिए उनकी करियर की दिशा तय करता है। ऐसे में परीक्षा की विश्वसनीयता और ईमानदारी सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। इस घटना के सार्वजनिक होने से शिक्षा विभाग को अपनी कार्यप्रणाली सुधारने के लिए त्वरित और प्रभावशाली कदम उठाना होगा ताकि विद्यार्थियों में विश्वास बना रहे और शिक्षा क्षेत्र में होने वाली किसी भी गड़बड़ी को रोका जा सके।



