NCERT ने कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में ‘आपातकाल’ को लोकतंत्र के लिए चुनौती के रूप में प्रस्तुत किया

नई दिल्ली, भारत | 25 अप्रैल 2024
भारत सरकार द्वारा आपातकाल के 50 वर्षों के स्मरण में कक्षा 9 की NCERT पाठ्यपुस्तक में आपातकाल को ‘लोकतंत्र के लिए चुनौती’ के रूप में प्रस्तुत करना एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। गत 1975 में लगाए गए आपातकाल ने भारतीय लोकतंत्र पर गहरा प्रभाव डाला था। इसे आज भी देश के इतिहास में एक संवेदनशील और गंभीर दौर के रूप में याद किया जाता है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस पहल का जोरदार समर्थन करते हुए कहा कि NCERT ने उचित कदम उठाया है और युवा पीढ़ी को इतिहास के इस महत्वपूर्ण अध्याय से अवगत कराना जरूरी है। उन्होंने बताया कि इतिहास को सही तरीके से पढ़ाना और समझाना ही भविष्य में ऐसी गलतियों से बचाव का मार्ग प्रशस्त करता है।
पाठ्यपुस्तक में आपातकाल के दौरान लागू की गई सख्त नीतियों, प्रेस की आजादी पर प्रतिबंध, बड़े पैमाने पर राजनीतिक गिरफ्तारी और संवैधानिक अधिकारों के हनन को विस्तार से वर्णित किया गया है। यह भी बताया गया है कि कैसे आपातकाल ने भारतीय लोकतंत्र की नींव को हिला दिया था और लोगों की आवाज़ दबाने का प्रयास किया गया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम छात्रों में राजनीतिक और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के लिए आवश्यक है। इसके माध्यम से वे लोकतंत्र के महत्व और उसकी रक्षा के लिए व्यक्तिगत और सामाजिक जिम्मेदारियों को समझ पाएंगे।
हालांकि कुछ पक्ष तीसरे दृष्टिकोण से पाठ्यपुस्तक की सामग्री पर चर्चा कर रहे हैं, लेकिन देश के शैक्षणिक माहौल में इस प्रयास को एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है। अब यह देखना होगा कि इस नई सामग्री को किस प्रकार प्रभावशाली ढंग से शिक्षण संस्थानों में लागू किया जाता है।
इस घटना के 50 साल पूरे होने के अवसर पर NCERT की यह पहल न केवल इतिहास की स्मृति को जिंदा रखेगी, बल्कि छात्रों के बीच लोकतন্ত্র की भावना को मजबूत करने में भी मदद करेगी।



