शिक्षा

व्यापार शिक्षा की समस्या: विषय के बजाय शब्दकोश के रूप में पढ़ाया जाना

नई दिल्ली, दिल्ली | 27 अप्रैल 2024

व्यापार शिक्षा भारत में सबसे बड़े शैक्षणिक क्षेत्रों में से एक है। लेकिन 2024 में हुई एक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, बी.कॉम स्नातकों में से आधे से कम को ही रोजगार के योग्य माना गया है। यह स्थिति चिंताजनक होने के साथ ही शिक्षा प्रणाली और करियर से जुड़ी चुनौतियों पर गंभीर सवाल उठाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बी.कॉम की पढ़ाई में व्यावहारिक और उद्योग-केंद्रित प्रशिक्षण की कमी, शिक्षा के शैक्षिक स्वरूप को कठोर और अनम्य बना देती है। अधिकांश संस्थान इस विषय को केवल शब्दकोश या पाठ्यपुस्तक आधारित शिक्षा के रूप में देखते हैं, जिससे छात्रों के कौशल और व्यावसायिक क्षमता विकसित नहीं हो पाती।

एक वरिष्ठ शिक्षाविद् ने कहा, “व्यापार शिक्षा को अब केवल थ्योरी तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। छात्रों को वित्त, लेखांकन, प्रबंधन आदि क्षेत्रों के साथ-साथ वास्तविक अनुभव भी जरूरी है।” इसलिए कई कॉलेज और विश्वविद्यालय उद्योग के साथ सहयोग कर व्यावहारिक परियोजनाएं और इंटर्नशिप शुरू कर रहे हैं ताकि छात्रों के रोजगार योग्यता में सुधार हो सके।

साथ ही, विशेषज्ञों ने छात्रों पर भी जोर दिया है कि वे पाठ्यक्रम के साथ-साथ तकनीकी और संचार कौशल जैसे क्षेत्र में भी खुद को अपडेट रखें। स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम्स, ऑनलाइन कोर्सेस, और उद्योग मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराना आवश्यक हो गया है ताकि वह नौकरी की मांगों को पूरा कर सकें।

सरकारी स्तर पर भी व्यावसायिक शिक्षा सुधार के लिए योजनाएं बनाई जा रही हैं, जिसमें कौशल आधारित शिक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। व्यापारी शिक्षा को पारंपरिक शब्दों से परे ले जाकर एक व्यवहारिक अनुशासन के रूप में स्थापित करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

कुल मिलाकर, यह स्पष्ट है कि व्यवसाय शिक्षा में सुधार आवश्यक है ताकि बी.कॉम स्नातक न केवल शैक्षणिक योग्यता हासिल करें बल्कि रोजगार के लिए तैयार भी बन सकें। इसके लिए शिक्षा संस्थानों, उद्योग, और सरकार को मिलकर काम करना होगा। तभी भारत के व्यापार क्षेत्र की प्रतिभा और संभावनाएं पूर्ण रूप से उभर पाएंगी।

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