ऑस्ट्रेलिया-फ़िजी रक्षा समझौते के बाद चीन ने किया लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण, जापान ने जताया कड़ा विरोध

सिडनी, ऑस्ट्रेलिया – ऑस्ट्रेलिया और फ़िजी के बीच नए रक्षा सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर होने के कुछ घंटे बाद चीन ने प्रशांत महासागर में लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है। इस मिसाइल परीक्षण में डमी वॉरहेड का उपयोग किया गया, जिसके चलते क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता की लहर दौड़ गई है।
यह परीक्षण उस समय हुआ जब ऑस्ट्रेलिया और फ़िजी ने एक रणनीतिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए, जो दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह समझौता प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के मद्देनजर आशंका और प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।
चीन की यह बैलिस्टिक मिसाइल, जिसकी श्रेणी लंबी दूरी वाली है, का परीक्षण प्रशांत महासागर में किया गया है। इसकी जानकारी सैन्य और कूटनीतिक सूत्रों ने दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम क्षेत्रीय तनाव को बढ़ा सकता है और प्रशांत क्षेत्र की सामरिक गतिशीलता को प्रभावित कर सकता है।
जापान ने इस मिसाइल परीक्षण की कड़ी निंदा की है और इसे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए खतरा बताया है। जापान की सरकार ने कहा है कि वह इस तरह के सैन्य अभ्यासों के खिलाफ है जो क्षेत्रीय शांतिस्थितियों को बिगाड़ सकते हैं।
ऑस्ट्रेलिया और फ़िजी के मध्य किया गया यह रक्षा समझौता दोनों देशों के बीच वैमानिक, नौसैनिक और अंतर्देशीय सैन्य प्रशिक्षण सहित कई क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देगा। इसके तहत दोनों देश मिलकर सुरक्षा खतरे से निपटने के लिए योजना बनाएंगे, जो विशेष रूप से चीन के बढ़ते सैन्य प्रभाव को रोकने के उद्देश्य से है।
विशेषज्ञों का कहना है कि चीन का यह मिसाइल परीक्षण एक संदेश है कि वह क्षेत्र में अपनी उपस्थिति और सैन्य क्षमता को मजबूत करने के लिए निर्णायक कदम उठा रहा है। इस घटना ने प्रशांत क्षेत्र में नई सुरक्षा जटिलताएं पैदा कर दी हैं।
आगामी हफ्तों में इस घटना पर वैश्विक समुदाय की प्रतिक्रिया पर नजर बनी रहेगी। क्षेत्रीय देशों के अलावा अमेरिका और अन्य पश्चिमी साथी भी इस परिस्थिति पर प्रतिक्रिया देंगे, जो प्रशांत महासागर की सामरिक स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
यह बताया गया है कि आगामी समय में ऑस्ट्रेलिया-फ़िजी रक्षा सहयोग से जुड़े कई अन्य रणनीतिक कार्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य क्षेत्र को शांतिपूर्ण और स्थिर बनाए रखना होगा।



