जापान में शाही उत्तराधिकार पर बड़ा फैसला, संसद ने पुरुष उत्तराधिकारियों को ही सम्राट बनाने वाले कानून को दी मंजूरी

टोक्यो, जापान
जापान की संसद ने शाही परिवार से जुड़े उत्तराधिकार कानून में महत्वपूर्ण संशोधन को मंजूरी देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि देश का सम्राट केवल पुरुष उत्तराधिकारी ही बन सकेगा। संसद से पारित इस संशोधन के बाद 19वीं सदी के शाही परिवार कानून में बदलाव किया गया है। इस फैसले को जापान की परंपरागत राजशाही व्यवस्था को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नए संशोधन के अनुसार, शाही परिवार में उत्तराधिकार का अधिकार केवल पुरुष सदस्यों तक सीमित रहेगा। इसके अलावा भविष्य में उत्तराधिकार की संभावित समस्या से निपटने के लिए दूर के पुरुष रिश्तेदारों को शाही परिवार में गोद लेने का विकल्प भी शामिल किया गया है। वहीं, जो राजकुमारियां आम नागरिकों से विवाह करेंगी, वे अब कुछ परिस्थितियों में अपना शाही दर्जा बनाए रख सकेंगी।
जापान में शाही परिवार लगातार छोटा होता जा रहा है। मौजूदा समय में उत्तराधिकार के लिए पात्र पुरुष सदस्यों की संख्या बहुत सीमित है। विवाह के बाद अधिकांश महिला सदस्य शाही परिवार छोड़ देती हैं, जिससे परिवार का आकार लगातार घट रहा है। इसी स्थिति को देखते हुए सरकार ने नए संशोधन के जरिए उत्तराधिकार व्यवस्था को स्थिर बनाए रखने का प्रयास किया है।
महिलाओं को सम्राट बनने का अधिकार देने की मांग कई वर्षों से उठती रही है। कई विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि बदलते समय के अनुसार उत्तराधिकार कानून में व्यापक सुधार होना चाहिए। हालांकि संसद ने इस बार पारंपरिक व्यवस्था को बनाए रखने का निर्णय लिया और पुरुष उत्तराधिकार की व्यवस्था को ही बरकरार रखा।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सरकार ने एक ओर पारंपरिक व्यवस्था को सुरक्षित रखा है तो दूसरी ओर शाही परिवार की संख्या बनाए रखने के लिए कुछ व्यावहारिक कदम भी उठाए हैं। दूर के पुरुष रिश्तेदारों को गोद लेने और राजकुमारियों के शाही दर्जे को बनाए रखने जैसे प्रावधान इसी दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
इस फैसले के बाद जापान में शाही परिवार की संरचना और उत्तराधिकार व्यवस्था को लेकर बहस तेज होने की संभावना है। आने वाले वर्षों में यदि योग्य पुरुष उत्तराधिकारियों की संख्या और घटती है, तो सरकार को भविष्य में इस विषय पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है।



