‘असली शिवसेना’ कौन? सुप्रीम कोर्ट में शुरू हुई अहम सुनवाई, उद्धव गुट ने चुनाव आयोग के फैसले को दी चुनौती

नई दिल्ली, दिल्ली
शिवसेना के असली राजनीतिक दल और उसके पारंपरिक चुनाव चिह्न ‘धनुष-बाण’ को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट में निर्णायक चरण में पहुंच गया है। बुधवार को शीर्ष अदालत ने उद्धव ठाकरे गुट की उस याचिका पर अंतिम सुनवाई शुरू की, जिसमें चुनाव आयोग द्वारा एकनाथ शिंदे गुट को असली शिवसेना के रूप में मान्यता देने और ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिह्न आवंटित करने के फैसले को चुनौती दी गई है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान अदालत ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी राजनीतिक दल का अपने विधायी दल पर नियंत्रण बना रहता है और सामान्य परिस्थितियों में पार्टी के अधिकृत निर्णयों का सम्मान किया जाना चाहिए।
हालांकि, न्यायालय ने यह भी कहा कि संसदीय लोकतंत्र में यदि अधिकांश निर्वाचित प्रतिनिधि वास्तव में पार्टी नेतृत्व के निर्णय से असहमत हों, तो उन्हें राजनीतिक निर्णय लेने की कुछ स्वतंत्रता मिल सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में भी राजनीतिक दल के संविधान और आंतरिक प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक होगा।
उद्धव ठाकरे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में दलील दी कि चुनाव आयोग ने फैसला सुनाते समय शिवसेना के संविधान की अनदेखी की। उन्होंने कहा कि केवल विधायी दल के बहुमत के आधार पर किसी राजनीतिक दल का नियंत्रण तय नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, पार्टी का संगठनात्मक ढांचा और संविधान भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
सिब्बल ने यह भी तर्क दिया कि यदि निर्वाचित विधायक चुनाव के बाद पार्टी के संगठनात्मक नेतृत्व से अलग होकर किसी अन्य राजनीतिक गठबंधन के साथ चले जाते हैं, तो यह मतदाताओं के जनादेश के विपरीत होगा। उन्होंने कहा कि इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था और राजनीतिक दलों की आंतरिक संरचना दोनों प्रभावित होती हैं।
फिलहाल मामले की सुनवाई जारी है। सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला न केवल शिवसेना विवाद का भविष्य तय करेगा, बल्कि राजनीतिक दलों के विभाजन, चुनाव आयोग के अधिकारों और दलों के संगठनात्मक ढांचे से जुड़े कानूनी सिद्धांतों पर भी दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।



