कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में मनमोहन सिंह को सुप्रीम कोर्ट से क्लीन चिट, सोनिया गांधी बोलीं- इतिहास ईमानदारी के लिए याद रखेगा

नई दिल्ली, दिल्ली
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद कांग्रेस ने उनकी ईमानदारी और जवाबदेही को लेकर पुरानी बातों को फिर सामने रखा है। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने मंगलवार को कहा कि ईमानदारी और जवाबदेही के मामले में मनमोहन सिंह का रिकॉर्ड नरेंद्र मोदी सरकार के काम करने के तरीके से बिल्कुल अलग है।
सोनिया गांधी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब 29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में मनमोहन सिंह की भूमिका को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चा फिर सुर्खियों में है।
मनमोहन सिंह ने जनवरी 2014 में प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए अपनी आखिरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि उन्हें विश्वास है कि इतिहास उनके प्रति उस समय के मीडिया और संसद में मौजूद विपक्षी दलों की तुलना में अधिक उदार रहेगा। उन्होंने यह बात उस समय कही थी, जब उनकी सरकार पर भ्रष्टाचार के कथित मामलों को लेकर विपक्ष और मीडिया की ओर से लगातार हमले किए जा रहे थे।
उस समय कोयला ब्लॉक आवंटन सहित कई मुद्दे तत्कालीन यूपीए सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बने हुए थे। सरकार की नीतियों और निर्णय प्रक्रिया को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा था। मनमोहन सिंह की व्यक्तिगत छवि को लेकर भी राजनीतिक बहस जारी थी।
29 जुलाई के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस नेताओं ने इसे मनमोहन सिंह के लिए महत्वपूर्ण राहत बताया। पार्टी ने उनके पुराने बयान को सामने रखते हुए कहा कि समय ने उनके दावे को सही साबित किया है।
सोनिया गांधी ने मनमोहन सिंह की ईमानदारी की प्रशंसा करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में उनका रिकॉर्ड जवाबदेही और ईमानदारी के लिहाज से अलग रहा है। उन्होंने इसकी तुलना नरेंद्र मोदी सरकार के काम करने के तरीके से की।
मनमोहन सिंह 2004 से 2014 तक देश के प्रधानमंत्री रहे। इससे पहले वे वित्त मंत्री समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके थे। प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में आर्थिक विकास, कल्याणकारी योजनाओं और विभिन्न नीतिगत सुधारों पर जोर दिया गया। हालांकि, दूसरे कार्यकाल के दौरान उनकी सरकार को भ्रष्टाचार के आरोपों और कई विवादों का सामना करना पड़ा।
कोयला ब्लॉक आवंटन मामले को लेकर भी तत्कालीन सरकार पर राजनीतिक दबाव बना रहा। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस ने इस मामले को मनमोहन सिंह की ईमानदारी के संदर्भ में पेश किया है। सोनिया गांधी की टिप्पणी के बाद पूर्व प्रधानमंत्री का जनवरी 2014 में दिया गया बयान भी फिर चर्चा में आ गया है।



