BRICS Summit 2026: नई दिल्ली पहुंचे ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, PM मोदी से द्विपक्षीय वार्ता; डॉलर पर भी साधा निशाना

नई दिल्ली, दिल्ली
18वें BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान शुक्रवार को नई दिल्ली पहुंच गए। राजधानी में 12 और 13 सितंबर को होने वाले सम्मेलन को लेकर तैयारियां पूरी होने के करीब हैं। BRICS देशों के प्रमुख नेताओं और प्रतिनिधियों के भारत पहुंचने के बीच पेजेशकियान की यात्रा पर भी खास नजर है। भारत दौरे के दौरान वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे।
ईरानी राष्ट्रपति की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहे हैं। BRICS के बढ़ते विस्तार के बीच सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग, व्यापार और वित्तीय व्यवस्था से जुड़े मुद्दे सम्मेलन के प्रमुख विषयों में शामिल हो सकते हैं।
BRICS को लेकर क्या बोले पेजेशकियान?
तेहरान से भारत के लिए रवाना होने से पहले पेजेशकियान ने पत्रकारों से बातचीत में BRICS के उद्देश्यों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि संगठन का प्रमुख उद्देश्य दुनिया में एकतरफावाद का मुकाबला करना है। उन्होंने सदस्य देशों के बीच सहयोग, एकजुटता और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करने पर जोर दिया।
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि BRICS देशों के बीच आर्थिक और वित्तीय सहयोग बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने सदस्य देशों के बीच आपसी निवेश को बढ़ावा देने की जरूरत बताई और कहा कि इससे व्यापारिक लेन-देन में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने BRICS के वित्तीय सहयोग से जुड़े संस्थागत ढांचे का भी उल्लेख किया। पेजेशकियान के मुताबिक, आर्थिक, वित्तीय, औद्योगिक और व्यापारिक सहयोग को बढ़ाकर सदस्य देशों के बीच संबंधों को और मजबूत किया जा सकता है।
भारत और ईरान के संबंधों पर नजर
पेजेशकियान ने भारत और ईरान के ऐतिहासिक संबंधों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मौजूद समानताओं और सहयोग के क्षेत्रों को और बढ़ाया जा सकता है।
भारत और ईरान के बीच ऊर्जा, व्यापार, परिवहन और क्षेत्रीय संपर्क महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। दोनों देशों के बीच बातचीत में क्षेत्रीय परिस्थितियां और आपसी हितों से जुड़े मुद्दे भी अहम रहते हैं। प्रधानमंत्री मोदी और पेजेशकियान की द्विपक्षीय बैठक में इन विषयों के साथ अन्य क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
BRICS में अब 11 देश
BRICS के विस्तार के बाद समूह में कुल 11 सदस्य देश शामिल हैं। इनमें ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।
समूह का विस्तार होने के बाद इसकी वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक भूमिका पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बढ़ी है। BRICS देशों की बड़ी आबादी और अर्थव्यवस्थाएं इसे वैश्विक मंच पर प्रभावशाली समूह बनाती हैं।
सम्मेलन में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
नई दिल्ली में होने वाले सम्मेलन में आर्थिक विकास, व्यापार, निवेश, वित्तीय सहयोग, औद्योगिक सहयोग और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं। इसके अलावा ग्लोबल साउथ के हितों और वैश्विक चुनौतियों पर भी सदस्य देशों के बीच विचार-विमर्श होने की उम्मीद है।
पेजेशकियान की भारत यात्रा इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि उन्हें BRICS के मंच पर ईरान की प्राथमिकताओं को रखने का अवसर मिलेगा। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी के साथ होने वाली बैठक से भारत-ईरान संबंधों में आगे के सहयोग की दिशा भी स्पष्ट हो सकती है।



