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गरीबी-मुक्त, पीड़ा-मुक्त समाज का संकल्प: प्रधानमंत्री मोदी

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर शिखर पर धर्म ध्वज फहराया गया

अजय सिंह, लखनऊ।
अयोध्या में आज इतिहास का एक उज्ज्वल अध्याय जुड़ गया। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज का ध्वजारोहण सम्पन्न हुआ। अभिजीत मुहूर्त में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाथ जोड़कर भगवान श्रीराम को प्रणाम किया। पूरे रामनगरी में उत्सव, आध्यात्मिक उल्लास और भक्ति का माहौल छा गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने इसे भारतीय सभ्यता के जागरण का पल बताते हुए कहा कि “सदियों बाद घाव भर रहा है, सदियों का संकल्प आज सिद्धि को प्राप्त हो रहा है।” उन्होंने कहा कि यह धर्म ध्वज केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि संघर्ष से उत्पन्न सृजन की गाथा और संतों की साधना का सार है।

‘दुख, लाचारी और गरीबी से मुक्त समाज का निर्माण हमारा लक्ष्य’ — पीएम मोदी

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि “हम ऐसा समाज बनाएं, जहां गरीबी न हो, कोई दुखी या लाचार न हो।” उन्होंने कहा कि जो लोग किसी कारणवश मंदिर नहीं आ पाते, वे दूर से ही ध्वज का दर्शन कर उतना ही पुण्य प्राप्त करते हैं। यह धर्म ध्वज युगों तक रामलला की जन्मभूमि का संदेश दुनिया भर तक पहुंचाएगा।

धर्म ध्वज: सभ्यता के पुनर्जागरण का प्रतीक

प्रधानमंत्री ने कहा कि ध्वज का भगवा रंग, उस पर अंकित ‘ॐ’ और सूर्यवंश की विरासत रामराज्य के आदर्शों का प्रतीक है। “ये ध्वज संघर्ष, संकल्प और सफलता का प्रतिरूप है।”
उन्होंने 500 वर्षों की तपस्या, त्याग, आस्था और संघर्ष को नमन करते हुए इसे “एक ऐसे यज्ञ की पूर्णाहूति” बताया जो कभी आस्था से डिगा नहीं।

श्रमवीरों और दानवीरों को पीएम मोदी का नमन

राम मंदिर निर्माण में सहयोग देने वाले सभी दानवीरों, श्रमवीरों, वास्तुकारों और योजनाकारों का आभार व्यक्त करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि बड़े संकल्पों को पूरा करने में गिलहरी जैसे छोटे प्रयास भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं।

अयोध्या: भारत के सामूहिक सामर्थ्य की चेतना स्थली

प्रधानमंत्री ने बताया कि राम मंदिर परिसर में सप्तस्थली तैयार की गई है, जहाँ निषादराज, मां शबरी, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि अगस्त्य, माता अहिल्या, संत तुलसीदास और महर्षि विश्वामित्र की प्रेरणादायी उपस्थिति दर्ज है। जटायू और गिलहरी की मूर्तियाँ यह संदेश देती हैं कि कोई भी योगदान छोटा नहीं होता।

अंत में पीएम मोदी ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए समाज की सामूहिक शक्ति आवश्यक है और राम मंदिर का यह दिव्य प्रांगण उसी सामर्थ्य का प्रतीक बन रहा है। उन्होंने विश्वभर के राम भक्तों को इस ऐतिहासिक अवसर की शुभकामनाएं दीं।

— सब तक एक्सप्रेस

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