PNB अधिकारी संघ ने बड़े पैमाने पर स्केल IV अधिकारियों के तबादलों पर चिंता जताई, समीक्षा की मांग की

चंडीगढ़, पंजाब – ऑल इंडिया पंजाब नेशनल बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन ने हाल ही में जारी तबादला आदेशों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। एसोसिएशन के अनुसार, बैंक के कुल स्केल IV अधिकारियों में से लगभग एक चौथाई, यानी कुल 1,142 अधिकारियों को एक साथ तबादले के आदेश दिए गए हैं, जिससे बैंक की कार्यप्रणाली और सेवाओं में गहरा व्यवधान उत्पन्न हुआ है।
ऑल इंडिया पंजाब नेशनल बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ने बताया कि इस विशाल संख्या में तबादलों से न केवल अधिकारियों का मनोबल प्रभावित हुआ है, बल्कि उनकी कार्यक्षमता और बैंक के ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करने की क्षमता पर भी विपरीत प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि ऐसे बड़े पैमाने पर तबादले बिना किसी व्यापक योजना या समीक्षा के किए गए हैं, जो बैंक की दीर्घकालिक रणनीतियों के साथ मेल नहीं खाते।
पंजाब नेशनल बैंक में स्केल IV अधिकारी उच्च पदों पर कार्यरत होते हैं और इनके तबादले बैंक की शाखाओं और विभागों के सुचारू संचालन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। जब इतने अधिकारी एक साथ स्थानांतरित किए जाते हैं, तो नई जगहों पर उनका अभ्यस्त होना और कार्यभार सम्हालना चुनौतीपूर्ण होता है, जिससे कामकाज में अव्यवस्था बढ़ती है।
एसोसिएशन ने सरकार और बैंक प्रबंधन से अपील की है कि इस निर्णय की पुनः समीक्षा की जाए और यदि आवश्यक हो तो तबादलों को स्थगित किया जाए ताकि अधिकारियों और बैंक की कार्यप्रणाली को होने वाली हानि को रोका जा सके। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसे तबादले अधिक सोच-विचार और व्यापक परामर्श के बाद ही किए जाएं।
बैंक अधिकारियों का कहना है कि बिना उचित पूर्व सूचना और योजना के बड़े स्तर पर तबादले न केवल कर्मचारियों में असंतोष पैदा करते हैं, बल्कि इससे ग्राहकों को भी प्रभावित होना पड़ता है। उन्हें उम्मीद है कि बैंक प्रबंधन उनके सुझावों को गंभीरता से लेगा और स्थिति का सुधार करेगा।
इस मुद्दे पर विशेषज्ञों का मत है कि भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में कर्मचारियों के प्रबंधन और स्थानांतरण की प्रक्रिया अत्यंत सावधानी से संचालित होनी चाहिए, खासकर तब जब वह उच्चस्तरीय अधिकारियों के समूह से संबंधित हो। अन्यथा इससे बैंक की सेवा गुणवत्ता और सामूहिक कार्यक्षमता दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
अंत में, पंजाब नेशनल बैंक अधिकारियों का मानना है कि इस विषम समय में संवाद और समझौते के माध्यम से ही समस्या का समाधान संभव है। उन्होंने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर सुमझौते के लिए तैयार हैं ताकि बैंक और उसके कर्मचारी दोनों के हित सुरक्षित रह सकें।



