शीर्ष तकनीकी संस्थानों में हर तीन में एक शिक्षकीय पद खाली | RTI डेटा

नई दिल्ली, भारत | 27 अप्रैल 2024
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने यह दावा किया था कि केंद्रीय वित्त पोषित तकनीकी संस्थानों (CFTIs) में नियुक्तियां नियमित रूप से हो रही हैं, लेकिन हाल ही में प्राप्त RTI (सूचना का अधिकार) डेटा ने इस दावे की सत्यता पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन शीर्ष तकनीकी संस्थानों में 35.2 प्रतिशत शिक्षकीय पद अभी भी खाली पड़े हैं।
RTI के तहत प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, कुल फैकल्टी पदों में से लगभग एक तिहाई पद खाली रहना एक गंभीर समस्या है जो उच्च तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्याप्त और योग्य शिक्षकों की कमी से छात्रों को अच्छी शिक्षा और मार्गदर्शन प्राप्त करने में बाधा आती है।
मध्यस्थों और शिक्षाविदों ने कहा है कि क्षमता वृद्धि और शोध विकास जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं में भी यह कमी महसूस की जा रही है। अभ्यर्थी और छात्र संगठन भी इस स्थिति को लेकर सरकारी तंत्र से तत्काल सुधार की मांग कर रहे हैं।
हालांकि शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि चयन प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और नियमों के अनुसार चल रही है, लेकिन पदों की इतनी बड़ी संख्या में रिक्तता यह दर्शाती है कि नियुक्ति प्रक्रिया में कुछ बाधाएं या विलंब जरूर हैं।
शिक्षा विशेषज्ञ बताते हैं कि तकनीकी संस्थानों में योग्य शिक्षकों की भर्ती में जल्दबाजी किए बिना उचित चयन प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए ताकि संस्थानों की गुणवत्ता बनी रहे। इसके साथ ही, मंत्रालय को नियमित रूप से पदों की स्थिति का जायजा लेना चाहिए और भर्ती प्रक्रिया को तेज़ करना चाहिए ताकि रिक्त पद भरकर छात्रों को गुणवत्ता वाली शिक्षा मिल सके।
विद्याथियों और अभिभावकों की ओर से भी कहा जा रहा है कि शीर्ष तकनीकी संस्थानों ने हमेशा से भारत के तकनीकी शिक्षा का स्तम्भ माना जाता है और यहां भारी संख्या में रिक्त पद शिक्षा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हैं। समय रहते इस मसले पर उचित ध्यान देना और आवश्यक कदम उठाना सरकार की जिम्मेदारी है।
इस मामले में आगे की सरकारी प्रतिक्रियाओं और सुधारों पर सभी की नजरें टिकी हैं, ताकि भारत के तकनीकी शिक्षण संस्थान विश्वस्तरीय शिक्षा देने में सक्षम बने रहें।



