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अमेरिका के ईरान पर नए हमलों के बाद तेल की कीमतों में लगभग 1% की वृद्धि, आपूर्ति तंग

वॉशिंगटन, डीसी – अमेरिकी सेना ने 9 जून, 2026 को ईरानी ठिकानों पर नई हवाई हमलों की घोषणा की, जो अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव का प्रतीक है। यह कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस कसम के बाद हुई है, जिसमें उन्होंने अमेरिकी अपाचे हमलावर हेलीकॉप्टर के मार गिराए जाने पर कड़ा जवाब देने का वादा किया था।

रविवार की रात को हुए इस घटना के बाद अमेरिकी प्रशासन ने ईरान को नसीहत देते हुए कहा कि इस प्रकार की हरकतों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने सैन्य प्रतिक्रिया का आदेश देते हुए कहा कि यह अमेरिका की सुरक्षा हितों पर हमला है, जिसे सख्ती से निपटना होगा।

अमेरिकी रक्षा विभाग ने बताया कि हमले में ईरान के कुछ सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है, जहां से अमेरिकी सेना के मुताबिक अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ खतरे पैदा हो रहे थे। इस कार्रवाई के परिणामस्वरूप क्षेत्र में तेल की आपूर्ति पर दबाव पड़ने लगा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 1% की तेजी देखी गई है।

विश्लेषकों का कहना है कि ईरान पर अमेरिकी हमले और तेल की आपूर्ति बाधित होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। इससे ना सिर्फ कच्चे तेल की कीमतें बढ़ेंगी, बल्कि इससे पूरे क्षेत्र की राजनैतिक स्थिरता भी प्रभावित हो सकती है।

इस बीच, संयुक्त राष्ट्र सहित विश्व के कई देशों ने युद्धविराम की अपील की है और दोनों पक्षों को शांति संवाद के लिए प्रेरित किया है। पश्चिम एशिया में लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच इस नए सैन्य संघर्ष के बाद वैश्विक स्तर पर चिंता की लहर दौड़ गई है।

विश्लेषकों ने सलाह दी है कि अमेरिका और ईरान को कूटनीतिक रास्ता अपनाना चाहिए ताकि युद्ध की संभावना को रोका जा सके और क्षेत्र की स्थिरता बरकरार रहे। इस घटना के बाद तेल की कीमतों में हुई तेजी से सामान्य उपभोक्ताओं पर भी आर्थिक दबाव पड़ सकता है, खासकर उन देशों में जो विदेशी तेल पर निर्भर हैं।

अंत में, यह स्पष्ट है कि अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए इस सैन्य हमले ने न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को बदला है, बल्कि विश्व बाजार और ऊर्जा सुरक्षा पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है। आने वाले दिनों में इस घटना से जुड़ी राजनीतिक और आर्थिक प्रतिक्रियाओं पर विश्व नजर रखेगा।

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