एरोबिक व्यायाम से उत्पन्न मांसपेशी प्रोटीन चूहों की स्मृति बढ़ाता है

नई दिल्ली, भारत
एक हालिया शोध से पता चला है कि व्यायाम के दौरान कंकाल की मांसपेशियों द्वारा सर्पिना1e नामक प्रोटीन का स्राव मस्तिष्क की कार्यक्षमता में सुधार कर सकता है। यह खोज स्मृति और संज्ञानात्मक क्षमता बढ़ाने के लिए नई संभावनाओं को जन्म देती है।
शोधकर्ताओं ने चूहों पर किए गए अध्ययन में यह पाया कि एरोबिक व्यायाम के बाद मांसपेशियों से सर्पिना1e प्रोटीन का स्राव होता है, जो दिमाग में जाकर तंत्रिका कोशिकाओं की मरम्मत और विकास को प्रोत्साहित करता है। इससे चूहों की सीखने और स्मृति क्षमताओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
वैज्ञानिक दल के प्रमुख डॉ. रवि कुमार ने बताया कि इस खोज से न केवल मस्तिष्क संबंधी बीमारियों जैसे अल्जाइमर और डिमेंशिया के इलाज में मदद मिल सकती है, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अहमियत भी सिद्ध होती है। उन्होंने कहा, “व्यायाम सिर्फ शरीर के लिए नही, मस्तिष्क के लिए भी असीम लाभकारी है।”
इस शोध के दौरान यह भी पता चला कि व्यायाम के माध्यम से शरीर की मांसपेशियां सक्रिय हो उठती हैं और वे कुछ विशेष प्रोटीन बनाती हैं, जो संज्ञानात्मक क्रियाओं को बढ़ावा देते हैं। यह वैज्ञानिक तौर पर साबित करता है कि शारीरिक सक्रियता और दिमागी स्वास्थ्य के बीच सीधा संबंध है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह अध्ययन हमें व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करने के लिए प्रेरित करता है ताकि मस्तिष्क को स्वस्थ रखा जा सके। भारत में बढ़ती मानसिक रोगों की घटनाओं को देखते हुए यह शोध बेहद महत्वपूर्ण कही जा रही है।
अगले चरण में शोधकर्ता मानव पर इस प्रोटीन के प्रभाव की जांच करने की योजना बना रहे हैं, जिससे यह समझा जा सके कि क्या यह पहलों स्वस्थ जीवनशैली के साथ मिलकर इंसानों के संज्ञानात्मक स्वास्थ्य को भी बेहतर बना सकता है। इस प्रकार के शोध से विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में नई क्रांति की उम्मीद की जा रही है।



